ब्लॉग छत्तीसगढ़

23 January, 2014

नया भू अधिग्रहण अधिनियम : सरकार एवं न्यायालय को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए

नया भू अधिग्रहण अधिनियम (भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्य र्वस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013  Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के प्रभावी हो जाने के बावजूद छ.ग.शासन के द्वारा पुराने अधिनियम (भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894) के तहत् की जा रही भू अधिग्रहण कार्यवाही उद्योगपतियों एवं नौकरशाहों के गठजोड़ का नायाब नमूना है. भारत गणराज्य के चौंसठवें वर्ष में संसद के द्वारा नया भू अधिग्रहण अधिनियम अधिनियमित कर दिया गया है जिसका प्रकाशन भारत का राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 27 सितम्बकर 2013 को किया गया है.

नया भू अधिग्रहण अधिनियम के प्रवृत्त होने की तिथि के संबंध में इस नये अधिनियम की धारा 1 (3) में कहा गया है कि ‘यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे’ इसी तरह पुराने अधिनियम के व्यपगत होने के संबंध में इस नये अधिनियम की धारा 24 में स्पष्टत किया गया है कि जहॉं पुराने भूमि अधिग्रहण अधिनियम के द्वारा जारी कार्यवाही में यदि धारा 11 के अधीन कोई अधिनिर्णय नहीं लिया गया है वहॉं नये अधिनियम के प्रतिकर का अवधारण किये जाने से संबंधित सभी उपबंध लागू होंगे. यदि किसी मामले में पांच वर्ष पूर्व भी कोई अधिनिर्णय लिया गया हो किन्तु भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं लिया गया हो या प्रतिकर का संदाय नहीं किया गया हो तो वहॉं पुरानी कार्यवाही को व्यपगत करते हुए, नये अधिनियम के उपबंधों के तहत अर्जन कार्यवाही नये सिरे से आरंभ की जावेगी.

पुराने भूमि अधिग्रहण अधिनियम के स्थान पर नये भू अधिग्रहण अधिनियम के प्रभावी होने की तिथि के संबंध में केन्द्रीय सरकार के द्वारा भारत का राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 19 दिसम्बिर 2013 को अधिसूचना जारी कर दी गई है जिसके अनुसार नया अधिनियम 1 जनवरी 2014 से प्रवृत्त हो गया है.

नये अधिनियम के प्रवृत्त हो जाने की तिथि 1 जनवरी 2014 के बाद भी छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा हजारों एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए पुराने अधिनियम के तहत् धारा 4, 6, 11 आदि का निरंतर प्रकाशन किया जा रहा है. जो मौजूदा अधिनियम के अनुसार व्यपगत कार्यवाहियॉं है. छत्‍तीसगढ़ शासन के नौकरशाह इसके लिए प्रशासनिक बौद्धिकता, कार्यालयीन श्रम, राज्‍य वित्त व समय का बेवजह व्यय करवा रहे है जो उचित नहीं है. इसके साथ ही यह भारतीय कानून एवं संविधान के प्रति जनता की आस्था पर भी कुठाराधात है. इस संबंध में सरकार एवं न्यायालय को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए एवं पुराने भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत् व्यवहरित अधिग्रहण कार्यवाहियों पर रोक लगाया जाना चाहिए.


3 comments:

  1. बेहतरीन जीवनोपयोगी पोस्ट बधाई सहित नमन

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  2. संजीव जी,
    विधि सबंधी बहुत सी बातें जो जन साधारण के लिए जरूरी हो सकती हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी से संबंधित हो सकती हैं और जिसकी जानकारी होने से लोग अपनी बहुत सारी उलझनों को सुलझा सकते हों] ऐसी तमाम जानकारियाँ समय-समय पर देते रहियेगा। बहुत बधाई।
    कुबेर

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  3. संजीव जी,

    बिलकुल सही कहा आपने छत्तीसगढ़ शासन के नौकर शाह के बौद्धिकस्तर बहुत नीचे है जिसमे चलते वे भारत के राजपत्र में प्रकाशित हो चुके "भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्यर्वस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013" को आज तक लागू नहीं कर पाए है | इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अपने विभागीय वेबसाईट पर http://cg.nic.in/revenue/ छ.ग.शासन के समस्त संभागीय आयुक्त एवं कलेक्टर्स को ज्ञापन क्रमांक एफ-4-3/सात-1/2014/182 के माध्यम से निर्देश जारी कर दिए है, पर आज भी भू-अर्जन अधिनियम 1894 संशोधित अधिनियम 1984 के धारा 4 एवं 6 के तहत अधिसूचना लगातार जारी हो रही है |

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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