कल ही मेरे एक नये ब्लॉगर साथी से मुलाकात हुई, उसने ब्लॉगजगत मे आते ही, प्रकाशित हो रहे, पढे जा रहे व पसन्द किये जा रहे पोस्टो को देखने के बाद कहा कि क्या हिन्दी ब्लॉगजगत मे कोई अदृश सत्ता की लडाई भी हो रही है ?, मैनें उन्हे कहा कि एसी कोई बात नही है, ऐसा तो साहित्यजगत मे भी होता आया है. हॉं यह फर्क जरूर है कि वहॉं लेखन के आधार पर लेखक को स्थापित करने के लिए युद्ध होते हैं. यहॉं लेखक के आधार पर उसके लेखन और विचार को स्थापित करने के लिये युद्ध होते हैं. उसने आगे कहा कि इससे प्राप्त सत्ता से क्या हो जायेगा? हमने कहा कि कुछ हो कि ना हो इससे मुफ्त मे ही दलनायको का नाम हिन्दी ब्लॉगजगत मे स्थापित हो जाते है, नये-नये प्यादे तैयार हो जाते हैं, प्यादे, प्रतिबधता जताते हुए कलम भांजना सीख लेते है और पोस्ट मे टिप्पणियो का कोटा फिक्स हो जाता है. मेरी बकबक से संतुष्ट ना होते हुए उन्होने कहा कि क्या साबित करना चाहते है लोग मुझे नही पता, पर परिस्थितियो को देखते हुए मेरा ब्लाग से मोहभंग हो गया है.
पिछले कई दिनों से हिन्दी ब्लॉगजगत के संजीदा लोगो के बीच निरंतर हो रहे पोस्ट और कमेण्ट के जूतमपैजार को देखते हुए मन अब सचमुच इस प्लेटफार्म से उचट सा गया है. मन तो बार बार यहां से जाने को होता है पर आप सबको पता है कि इसका नशा जल्दी छूटता नही है. हमारे जैसे निजी व्यावसायिक - औद्यौगिक संस्थानो मे सेवा बजाने वाले लोगों के पास ब्लॉगिंग के लिये बहुत कम समय रहता है. जो समय रहता है वो भी इन किटिर - किटिर को पढने उसमे आये टिप्पणियों को पढने मे और उससे क्षणिक तौर पर ही सही उठते रंज को सामान्य करने मे चला जाता है. यदि इनके बीच कोई समय चुराकर अपने ब्लॉग के लिये कोइ पोस्ट लिखे तो लोग उस पोस्ट के शब्दो मे और तो और हमारे पेशे मे भी जब इन विवादो के अंतर्निहित अर्थ ढूढने लगते है तो बडा क्षोभ होता है, क्या हम सिर्फ पाबला वर्सेस अनूप पढने के लिए ही हिन्दी ब्लॉगजगत में हैं ? आखिर कब खत्म होगा पाबला वर्सेस अनूप का वाद .. ? आप सभी जज है यहॉं.
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बहुत कम उपलब्ध पोस्टों और स्तरीयता की कसौटी मे खरे ना उतरते लगभग उतने ही डिलीट कर दिये गये पोस्टों के बीच हम हिन्दी ब्लॉगजगत मे छत्तीसगढ की परम्परा, साहित्य, संकृति व समसामयिक विषयो को प्रस्तुत करने के लिये आये है और आगे इसी मे रमे रहेंगे. इस पोस्ट से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची होगी तो मुझे क्षमा करेंगें. राम राम.
संजीव तिवारी
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बहुत कम उपलब्ध पोस्टों और स्तरीयता की कसौटी मे खरे ना उतरते लगभग उतने ही डिलीट कर दिये गये पोस्टों के बीच हम हिन्दी ब्लॉगजगत मे छत्तीसगढ की परम्परा, साहित्य, संकृति व समसामयिक विषयो को प्रस्तुत करने के लिये आये है और आगे इसी मे रमे रहेंगे. इस पोस्ट से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची होगी तो मुझे क्षमा करेंगें. राम राम.
संजीव तिवारी
