2008/05/22

औकात जो भुलाये न बने

कल रायपुर के कोर्ट के गलियारे में पसीने से लथपथ काले कोट में लदे फदे गुजारने के बाद संजीत जी से बातें तय हुई कि कार्टून वॉच के श्री त्र्यंबक शर्मा जी को भी ब्लाग का लड्डू चखा दिया जाये सो हम दोपहर में रायपुर के मजेदार गर्मी का मजा लेते हुए संजीत जी के घर पहुचे और वहां से त्र्यंबक जी से बात कर त्रयंबक जी के घर पहुंचे । संजीत जी नें अपनी हिन्दी ब्लाग आबादी बढाने की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, त्र्यंबक जी को लगभग सभी आवश्यक जानकारी दी फिर हम अपने नगर यानी दुर्ग-भिलाई की ओर निकल पडे ।

रास्ते में ध्यान आया कि कुछ पारिवारिक मिलन भी हो जाये, क्योंकि मेरे परिवार के बहुतायत सदस्य रायपुर में ही रहते हैं रायपुर मेरा लगातार आना जाना लगा रहता है पर व्यावसायिक व्यस्तता की वजह से परिवार के लोगों से मिल नहीं पाता सो कल मैने रायपुर में ही निवासरत मेरे चाचा श्री के घर चला गया ।


वहां मेरी एक छोटी चचेरी बहन से मुलाकात हुई, सामाजिक कार्यक्रमों के दुआ-सलाम को यदि छोड दिया जाये तो मैनें लगभग 14 सालों बाद उसके पास एक घंटा बिताया । चर्चा के दौरान मेरी उस बहन की शादी का एक वाकया मुझे याद आ गया और मैने उसे वहां जिक्र करते हुए पूछा । वाकया कुछ यूं था कि मेरी बहन की शादी के वक्त बारात में बहन का जेठ (दूल्हे का बडा भाई) संपूर्ण शादी की व्यवस्था देख रहे थे, मंडप में चारो तरफ घूम घूम कर सभी बारातियों को चाय पानी नाश्ता मिला कि नहीं बार बार पूछ रहे थे और समय समय पर हम घरातियों को धौंस भी लगा रहे थे कि यहां पानी दो, वहां नाश्ता दो । छत्तीसगढ की तपती गर्मी में टाई सहित थी पीस सूट से लिपटे उस महाशय के रौब को मैं पल पल निहारता था कुछ खीझता था पर छोटी बहन की शादी को देखते हुए उसके आदेश पर जी जी कर रहा था ।

उस महाशय के व्यक्तित्व में टाई सहित थी पीस के अलावा कुछ भी विशेष नहीं था, हां उसने आयातित श्रृंगार के साथ देशी तडका के रूप में पैरो पर रबर के (‘करोना’ के) स्‍लीपर पहन रखे थे जो बडा अटपटा लगता था पर हम अपने हमउम्र भाईयों को देख कर इस पर मुस्‍काने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे थे । मजाक में हममें से कोई दूसरे भाई को कहता कि ‘जा रे ओ टाई चप्‍पल वाला तुमको पानी लेके बुला रहा है’ और हम लोगों की हंसी समवेत फूट पडती ।


उस समय हमने उसके संबंध में जानकरी इकत्र की थी उसके अनुसार वह राज्‍य शासन के अंतरगत मंडी निरीक्षक के पद पर कार्यरत था और अच्‍छा खासा मालदार आसामी था । आज वह बहन मिली तो हमने उस ‘टाई चप्‍पल’ वाले के संबध में पूछा वह बतलाने लगी कि वे अब प्रमोशन के बाद जिला स्‍तरीय अधिकारी बन गये हैं और गाडी बंगले सहित माता लक्ष्‍मी नें उनके घर में स्‍था ई निवास बना लिया है पर वे आज तक सस्‍ता चप्‍पल(स्‍लीपर) पहनना नहीं छोडे हैं ।


मैंने उत्‍सुकता वश पूछा कि ऐसा क्‍यों क्‍योंकि न तो वे अशिक्षित हैं ना ही पैसे की कमी है कम से कम चमडे का थोडा अच्‍छा सा चप्‍पल तो पहन ही सकते हैं । (ज्ञानदत्‍त जी के जूतों वाला पोस्‍ट याद हो आया) बहन नें बतलाया कि वे ऐसा जान बूझ कर करते हैं अपने भाईयों एवं बच्‍चों को कहते हैं कि बेटा मैं जब जब अपने पैरों की ओर देखता हूं तो मुझे अपने बीते गरीबी वाले दिन याद आते हैं और तब मुझे आत्मिक आनंद आता है, दुनिया हंसती है इसका मुझे अब परवाह नहीं है, यही मेरी औकात है ।


मेरे मन में उन महाशय के प्रति इन 14 सालों तक जो छबि बनी थी उसे इन नें भंग कर दिया । जिसे हम गंवारूपन कह रहे हैं वह किसी का तप है या थोथा आडंबर इन बातों में डूबता उतराता हुआ मैं दुर्ग- भिलाई के लिये बढ चला ।

2008/05/17

छत्तीसगढ़ में बनेगा देश का पहला कार्टून म्यूजियम : बी बी सी में कार्टूनिस्ट त्र्यंबक शर्मा का इंटरव्यू

छत्तीसगढ़ में बनेगा देश का पहला कार्टून म्यूजियम

पिछले दिनों हमने छत्‍तीसगढ केकार्टूनिस्ट त्र्यंबक शर्मा जी की कार्टून पत्रिकाकार्टून वाचकी लंदन में प्रदर्शनी के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की थी लंदन से उनके आने के बाद उनसे इस संबंध में कुछ और जानकारी प्राप्‍त हुई जिसे आपके लिये प्रस्‍तुत कर रहे हैं

लंदन के नेहरू सेन्टर में कार्टून की प्रदर्शनी आयोजित कर लौटे कार्टूनिस्ट त्र्यम्बक शर्मा का मानना है कि कार्टून की भाषा एक ग्लोबल भाषा है बशर्ते वह बिना टिप्पणी के हो. उन्होंने कहा कि बिना टिप्पणी वाला कार्टून विश्व के किसी भी देश के किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है.


श्री शर्मा ने हमासे विशेष बातचीत में बताया कि देश की एक मात्र कार्टून पत्रिका के १२ वर्ष तक के सफल प्रकाशन के उपरांत उनकी कार्टून म्यूजियम की परिकल्पना भी शीघ्र साकार होते दिख रही है. उन्होंने बताया कि अभी देश में एक भी कार्टून म्यूजियम नहीं हैं और छत्तीसगढ़ में पहला कार्टून म्यूजियम बनाने की उनकी योजना है.


फिलहाल संस्कृति विभाग द्वारा कार्टून वाच पत्रिका को एक गैलरी प्रदान की जा रही है, जिसमें वे कार्टून म्यूजियम की झलक पेश कर सकेंगे, लेकिन भविष्य में इसके लिए बड़ी जगह की आवश्यकता होगी. उन्होंने बताया कि वे लंदन के कार्टून म्यूजियम का अवलोकन कर चुके हैं और उन्हें वहां का लाईफ-टाईम गेस्ट मेम्बर भी बनाया गया है.


श्री शर्मा चाहते हैं कि कार्टून म्यूजियम ऐसा बने कि पूरे विश्व में उस तरह का वह पहला और अनोखा कार्टून म्यूजियम हो. उनका मानना है कि इसके बनने से छत्तीसगढ़ को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी. लंदन के वैक्स म्यूजियम ``मैडम टूसाड'' का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब मैडम टूसाड ने इसकी कल्पना की होगी तब भी लोग उन पर हंसे होंगे कि ऐसे म्यूजियम को देखने कौन आएगा जिसमें मोम से बने पुतले रखे हों.

उन्होंने बताया कि चूंकि वे विश्व स्तर पर कार्टून के क्षेत्र में नया काम करना चाहते हैं इसलिए वर्तमान में विश्व के अनेक जगहों पर स्थित कार्टून म्यूजियम की जानकारी हासिल कर रहे है. वे नहीं चाहते कि छत्तीसगढ़ का कार्टून म्यूजियम किसी अन्य कार्टून म्यूजियम की नकल मात्र हो.


उन्होंने कहा कि विदेशी लोग अपनी पुरानी वस्तुओं को सहेज और संवार