ब्लॉग छत्तीसगढ़

02 February, 2016

पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन का ठीहा : गढ़कलेवा


खानपान के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय भोज्यपदार्थों के प्रति बढ़ती जनता की रूचि एवं शहरीकरण के चलते हम अपने पारंपरिक खान-पान को विस्मृत करते जा रहे हैं। देश के कई क्षेत्रों में पारंपरिक खान-पान की परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है, जबकि माना जाता है कि खान-पान संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। हमारी खान-पान की परंपरा हमारी क्षेत्रीय अस्मिता का गौरव है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के संस्कृति संचालनालय द्वारा 'गढ़कलेव' के नाम से पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का एक रेस्टॉरेंट रायपुर में खोला गया है।


'गढ़कलेवा' का परिसर एक ठेठ खूबसूरत छत्तीसगढ़ी गांव के रूप में तैयार किया गया है। इस स्थल की साजसज्जा और जनसुविधाएं छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन का आनंद दिलाते हैं। जिसे गांव के ही पारंपरिक शिल्पियों ने ही मूर्त रूप देते हुए आकार दिया है। वर्तमान में यहाँ पारंपरिक परिवेश और बर्तनों में लगभग तीन दर्जन छत्तीसगढ़ी व्यंजन परोसा जा रहा है। आगे मध्यान्ह तथा रात्रि भोजन भी उपलब्ध कराया जायेगा।

इसका शुभारंभ प्रदेश के मुख्य मंत्री डॉ.रमन सिंह के द्वारा 26 जनवरी 2016 को किया गया। इस जलपानगृह में छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे ठेठरी, खुरमी, चीला, मुठिया, अंगाकर रोटी, बफौरी, चउसेला जैसे तीन दर्जन से भी अधिक पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ी परिवेश उपलब्ध कराने के लिए परिसर में लकड़ियों की आकर्षक कलाकृतियां भी बनाई गई हैं और दीवारों की भित्तिचित्र के माध्यम से सजावट की गई है। गढ़ कलेवा में जलपान में शामिल चाउर पिसान के चीला, बेसन के चीला, फरा, मुठिया, धुसका रोटी, वेज मिक्स धुसका, अंगाकर रोटी, पातर रोटी, बफौरी सादा और मिक्स, चउंसेला आदि परोसा जा रहा है। इसके अलावा मिठाइयों में बबरा, देहरउरी, मालपुआ, दूधफरा, अईरसा, ठेठरी, खुरमी, बिडि़या, पिडि़या, पपची, पूरन लाडू, करी लाडू, बूंदी लाडू, पर्रा लाडू, खाजा, कोचई पपची आदि भी परोसा जा रहा है। गढ़ कलेवा का एक अति महत्वपूर्ण पक्ष इसका परिसर है, जिसे ठेठ छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश के रूप में तैयार किया गया है। इसकी साज-सज्जा और जनसुविधाएं सभी कुछ छत्तीसगढ़ ग्रामीण जीवन का आनंद उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं।

19 January, 2016

समाचार : अपना सिर्फ दो हजार लगाएं,बनाएं शौचालय

राजधानी में भारत स्वच्छता मिशऩ में आड़े आ रही जमीन की कमी

राजधानी में मात्र 5,649 पात्र हितग्राही, हो चुका सर्वे

रायपुर। भारत स्वच्छता मिशन के अंतर्गत अब आप मात्र दो हजार रुपए में स्वयं का शौचालय बनवा या बना सकते हैं बशर्ते आपका नाम निगम द्वारा किए गए सर्वे में शौचालय विहीन घर के रुप में आया हो। केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित इस योजना के संचालन में राजधानी की गरीब बस्ती में जमीन की अनुपलब्धा प्रमुख अड़चन के रूप में सामने आ रही है।
नगर पालिका निगम के भारत स्वच्छता मिशऩ के नोडल अधिकारी अभियंता हरेन्द्र साहू बताते हैं कि इस योजना में एपीएल बीपीएल का कोई लफड़ा नहीं है राजधानी का कोई भी किसी भी श्रेणी का व्यक्ति अगर उसके घर में शौचालय नहीं है और उसके पास शौचालय बनवाने लिए जमीन है तो उसे इस योजना में शामिल किया जाएगा। चाहे फिर वह करोड़पति ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि दो हजार रुपए में आप शौचालय बनवाने में सक्षम होंगे बल्कि स्वच्छता मिशन के माध्यम से आपको 18 हजार की सब्सीडी मिलेगी जिसका उपयोग कर आप शौचालय बनाने या बनवाने में कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आप अपने शौचालय को और अच्छा बनाना चाहते हैं टाइल्स वगैरह लगाना चाहते हैं तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं है,उसका खर्चा स्वयं आपको वहन करना पड़ेगा। इसके अलावा ज्यादा सदस्यों वाले परिवार में दूसरे सहनिवासी परिवार के नाम से भी अतिरिक्त टायलेट बनवाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस योजना का सर्वे राजधानी में हुआ है सर्वे में कुल 7 हजार 9 सौ 14 मकान बिना शौचालय के पाए गए। इन मकानों में से 5 हजार 6 सौ 49 घरों को शौचालय निर्माण के लिए पात्र पाया गया। इन मकानों में 2019 तक शौचालय का निर्माण कराने की योजना चल रही है। श्री साहू ने बताया कि राजधानी के 15 प्रतिशत घरों में शौचालय बनाने के लिए जगह की कमी है जिसके कारण उनके लिए सार्वजनिक शौचालय ही विकल्प है। उन्होंने कहा कि इस योजना का अगला सर्वे फिर होगा अगर किसी का मकान छूट गया होगा तो वह उसके बाद के सर्वे में अपना नाम जुड़़वा सकता है।

योजना में शामिल होने के पात्र परिवार
ऐसे परिवार जिनके यहां शौचालय नहीं है और जिनके सदस्यों की संख्या 5 तक है इसके अलावा उनके पास घर के अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए कम से कर आठ गुणा छह फुट की जमीन है । वे इस योजना में शामिल होकर शौचालय निर्माण की सहमति दे सकते हैं तथा नियमानुसार दो हजार रुपए नगर निगम में जमा कर सकते हैं। वैसे इस योजना के लिए सामान्यतया दस गुणा आठ फुट की जगह उपयुक्त होती है।

योजना के लिए अपात्र परिवार
इस योजना में कुछ परिस्थियों में शौचालय निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती है -जैसे तालाब के किनारे की बस्ती क्योंकि पास डिजाइऩ में सोख्ता टंकी बनाने का प्रावधान है जो तालाब को प्रदूषित कर सकता है। इसके अलावा रेलवे की बेजा कब्जा वाली जमीन पर तथा ऐसी बस्तियां जिन्हें निकट भविष्य में विस्थापित किया जाना है।

योजना में अलग-अलग हितग्राही अंशदान
भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने के अभियान में विभिन्न स्तरों पर हितग्राहियों से अलग-अलग अंशदान लिए जाने का प्रावधान है। नगर पालिक निगम क्षेत्र में दो हजार रुपए, नगर पालिका क्षेत्र में डेढ़ हजार तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक हजार रुपए का अंशदान लिया जाता है। हर स्तर पर डिजाइन भी बदलती है।

योजना एक नजर में
2014-15 के बचे शौचालय निर्माण 700
2015-16 का लक्ष्य 3000
अभी तक पूर्ण हुआ निर्माण 2019
निर्माण में लगे एनजीओ व ठेकेदार 43
(केवल राजधानी में संचालित योजना का ब्योरा)

ऐसे मिलेगी हितग्राही को राशि
हितग्राही स्वयं के योजना में शामिल होने की सहमति देगा और अपना बैंक अकाउंट देगा क्योंकि राशि सीधे खाते में जाएगी।
जमीन पर कार्य दिखाने के साथ हितग्राही के खाते में 2 हजार जमा होंगे।
स्लेब लेबल का काम दिखाने पर मिलेंगे 7 हजार रुपए।
हितग्राही के शौचालय बनवाकर उपयोग करने का प्रमाण दिखाने पर मिलेंगे 9 हजार रुपए।
(योजना में कार्य का प्रमाण मोबाइल से फोटो खींचकर दिखाना पर्याप्त है)

-प्रमोद ब्रम्‍हभट्ट
रायपुर
प्रमोद ब्रम्‍हभट्ट जी वरिष्‍ठ पत्रकार हैं, वर्तमान में रायपुर के प्रतिष्ठित दैनिक अखबार 'जनता से रिश्‍ता' से जुड़े हैं।
इनसे आप फेसबुक पर यहॉं संपर्क कर सकते हैं। 

Popular Posts