भारतीयता की भावना के साथ नेट मित्रों को जगमग छत्तीसगढ़ से परिचित कराने हेतु एक प्रयास. इस ब्लॉग में आपका एवं आपके टिप्पणियों का स्वागत है.

5.9.10

रविवार की छुट्टी और गांव की खुशबू के साथ 'फरा' का स्‍वाद, अहा !

आज रविवार छुट्टी का दिन, वैसे तो हमारे जैसे निजी संस्‍थानों में सेवा दे रहे लोगों के लिए महीने के चार रविवार में से एक दो रविवार को ही पूरी तरह से छुट्टी मिल पाती है नहीं तो 'अर्हनिशं सेवामहे (टेलीफोन विभाग का ध्‍योय वाक्‍य)' मंत्र पढ़ते हुए सेवा देना होता है। पूरे सप्‍ताह लगभग सुबह 9 से रात 9 तक कार्यालयीन कार्यो में व्‍यस्‍त होने के बाद घर का कोई भी काम करने का मन नहीं होता, ऐसे समय में मैं तो 'गृह कारज नाना जंजाला' कह कर अपने आप को झूठी दिलासा दिलाता हूं और रविवार को चाहता हूं कि पूरा समय अपने घर परिवार को दू, ताकि इस दिन इस नाना जंजालों को पूरा कर सकूं। इस दिन मित्रों के फोन भी नहीं अटेंड करता क्‍योंकि 'नहीं' ना कहने के कारण मैं अधिकतम बार रविवार को अपने घर की खुशी बर्बाद कर बैठता हूं।
.... पर आज मुझे छुट्टी मिली सुबह कुछ घंटो के लिये और शाम को कुछ घंटो के लिये, शुक्र है, छुट्टी तो मिली, बहुत खुशी की बात है। ............. सुबह इसी खुशी के समय में श्रीमती जी नें छत्‍तीसगढ़ के पारंम्‍परिक व्‍यंजन फरा बनाने की घोषणा कर दी। मेरा छत्‍तीसगढि़या मन प्रफुल्लित हो उठा क्‍योंकि शहरों में रहते हुए ऐसे व्‍यंजन बहुत कम ही बनते हैं। ... तो फरा के लिए रात का बचा हुआ पका चावल (भात) और चांवल आटे को सान कर लोई तैयार कर ली गई और श्रीमती नें मुझे भी फरा बनाने के लिए किचन में आमंत्रित किया, मेरा किचन से बहुत कम नाता रहा है और सच्‍ची कहूं तो मुझे कुकिंग बिल्‍कुल पसंद नहीं है फिर भी आज रविवार का दिन था तो जैसे तैसे मैने दोनों हाथो से कुछ फरा को रूप देकर बाकी को श्रीमती के लिये सौंपकर वापस अपने लैपटाप पे आ गया। श्रीमती नें बाकी लोई से फरा बेलकर, तेल में जीरा, मिर्च का छौंक देकर धनिया आदि डालकर छत्‍तीसगढ़ का यह व्‍यंजन बनाया जिसे हमने पेटभर खाया आप चित्र देखें -
 
फरा हथेली से बेल लिया गया है
 
अब कड़ाही में पकने को तैयार
 
मुझे कुछ ज्‍यादा कड़क चाहिए तो फिर से काली कड़ाही में तली जा रही है
अब तैयार है गांव की खुशबू के साथ फरा
हमने सुना है कि दुर्ग की सांसद सरोज पाण्‍डेय ने पिछले सप्‍ताह अपने दिल्‍ली स्थित निवास में सांसदों को भोज में आमत्रित किया था और छत्‍तीसगढ़ी खाना-खजाना के साथ फरा भी परोसा था। मेरी आकांक्षा पांच सितारा होटलों में इन्‍हें परोसने की है, देखिये ये कब तक हो पाता है।
मुझे भान है कि उपर लिखा गया व्‍यौरा मेरे अनुसार से मेरे पोस्‍ट आईटम के योग्‍य नहीं है फिर भी 'फरा' के संबंध में पाठकों को बतलाने के लिए यह पोस्‍ट पब्लिश कर रहा हूं, क्षमा सहित. ...
संजीव तिवारी  

4.9.10

निवेदक : ऐसे भी




चित्र श्री हसन जावेद जी के फेसबुक एल्‍बम 'लाल आतंक पर लगे लगाम' से साभार