आज दोपहर बाद नगर पालिक निगम, भिलाई के भवन अनुज्ञा शाखा कुछ काम से जाना हुआ। कार्यपालन अभियंता सह भवन अधिकारी महोदय के पास बैठा ही था कि एक व्यक्ति अंदर आया और अपना परिचय भवन अधिकारी को दिया। भवन अधिकारी और आगंतुक के बीच हो रही चर्चा से यह ज्ञात हुआ कि आगंतुक के भवन में अवैध निर्माण के संबंध में तीन शिकायत निगम को मिला था। आगंतुक नें अधिकारी से कहा कि उसके भवन में कुछ भी अवैध निर्माण नहीं हो रहा है, जो निर्माण हो रहा है उसकी अनुज्ञा प्राप्त है जिसे मैं साथ लाया हूँ। आगंतुक नें आगे कहा कि फिर भी आप अपने अभियंता से जांच करवा लीजिये, मेरे भवन में चार किरायेदार हैं जो मेरे दुकान पर कब्जा कर लिये हैं ना किराया दे रहे हैं ना दुकान खाली कर रहे हैं और समय बेसमय सूचना के अधिकार के तहत कभी इनकम टैक्स से तो कभी सेल्स टैक्स से और कभी निगम से मेरे व्यवसाय की फाईल की कापी मांगते रहते हैं, मैं छोटा सा व्यवसायी हूँ साहब परेशान हो गया हूं, मेहनत के पैसे से छ: दुकान बनवाया हूं। भवन अधिकारी उसके अनुरोध पर एक अभियंता को आगंतुक के साथ उस भवन में भेज दिया। मेरे बैठे-बैठे ही लगभग पंद्रह मिनट में अभियंता और आगंतुक वापस आ गए, अभियंता नें बतलाया कि अवैध निर्माण नहीं हो रहा है बल्कि अनुज्ञा प्राप्त तल में टाईल्स लगाया जा रहा है।
आगंतुक नें भवन अधिकारी से अनुरोध किया कि महोदय, मुझे उस फर्जी शिकायत को दिखाया जाय। अधिकारी ने फाईल मंगवाया, और आगंतुक वह पत्र देखने लगा जो पंजीकृत डाक से भवन अधिकारी को प्राप्त हुआ था जिसमें आगंतुक के द्वारा अवैध निर्माण के संबंध में कहानी गढ़े गए थे। मैं आगंतुक के बाजू में बैठा था इस कारण वह पत्र मैं भी सुविधाजनक रूप से पढ़ पा रहा था। आवेदन के अंत में लिखे शब्द नें मेरी उत्सुकता बढ़ा दी, वहां लिखा था 'कापी टू श्रीमान अन्ना हजारे, रालेगन सिद्धी, म.रा.' । मेरे चेहरे में फैलती मुस्कान अब हसी में बदल गई और आगंतुक सहित कार्यालय में बैठे सभी लोग हसने लगे थे।
शिकायतकर्ता का जो नाम और पता लिखा था वह पूर्णतया फर्जी था, क्यूंकि जिस परिसर का पता दिया गया था उस परिसर में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है यह मैं जानता था। शिकायतकर्ता द्वारा यह शिकायत क्यूं प्रेषित किया गया था यह समझ में नहीं आया किन्तु कापी टू अन्ना हजारे को देखकर होठ बार बार बुदबुदाते रहे 'कापी टू ......'
उस पत्र को देखने के बाद से मैं सोंच रहा हूँ कि 1. क्या लोग अन्ना पर भरोसा करते हैं, 2. क्या लोग अन्ना को मजाक समझते हैं या 3. क्या लोग अन्ना के नाम पर सरकारी कर्मचारियों को डराते हैं या रौब गांठते हैं। या 4. क्या अन्ना और सूचना के अधिकार कानून के नाम पर ब्लैकमेलिंग चालू हो गई है।
जो भी हो अब मैंनें भी सीख लिया है कोई सरकारी विभाग में शिकायती पत्र लिखना है तो नीचे लिखा जाए 'कापी टू अन्ना हजारे' भले भेजें कि मत भेजें।
संजीव तिवारी
संजीव तिवारी



























