हिन्दी ब्लॉग जगत में जैसे तैसे हमारा चार साल का वक्त गुजर रहा है और हम भरसक प्रयत्न कर रहे हैं कि इस ब्लॉग में छत्तीसगढ़ के संबंध में यथेष्ठ जानकारी आपको नियमित देते रहें. कुछ मित्रों नें हमारी आलोचना भी की है कि हम अपने इस ब्लॉग में अपनी कम दूसरों की लेखनी ज्यादा परोसते हैं और अपने आप को ब्लॉगर बतलाते हैं। उनका कहना है कि जब अपनी लेखनी नहीं तो काहे का ब्लॉगर ऐसे में तो सिर्फ टाईपिस्ट ही हुए ना। ठीक है हम टाईपिस्ट ही सहीं, हमें मित्रों के इस बात से कोई रंज नहीं क्योंकि इस ब्लॉग में हमारी समझ के अनुसार छत्तीसगढ़ के विषय में दूसरों की लिखी भी प्रकाशित होनी चाहिए इसलिए उसे हम प्रकाशित करते हैं।
ब्लॉगरी के पीछे मेरा उदेश्य स्वांत: सुखाय होने के साथ ही भविष्य की दस्तावेजीकरण भी है, हालांकि इस पर भी मित्रों का कहना है कि गूगल के भरोसे रहकर दस्तावेजीकरण की बाते करना एक दिवा स्वप्न है क्योंकि गूगल कभी भी ब्लॉगों को बंद कर सकता है, कर दे अपनी बला से, उम्मीद पे दुनिया कायम है। जब स्काईलेब गिरने वाला था तब भी हमारे किशोर मन में उम्मीद थी कि हम जिन्दा रहेंगें, और आज तक हैं।
हमारे प्रयासों से एक, एवं स्वयं के प्रयासों से सौ के अनुपात में हिन्दी ब्लॉगर छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो गए। इस बात की हमें अत्यंत खुशी है क्योंकि हमें लगता है कि अब छत्तीसगढ़ के विषयों पर सक्रियता से निरंतर पोस्ट लिखने वाले भी तैयार हो रहे हैं एवं इंटरनेट में प्रदेश की सांस्कृतिक छवि से लोग परिचित हो रहे हैं। जब हमने हिन्दी ब्लॉगिंग आरंभ की थी तब कई ब्लॉगर और पाठक कहते थे कि वे इस प्रदेश की सांस्कृतिक, साहित्तिक व पारंपरिक वैभव से परिचित ही नहीं हैं या कहें तो वे जानते ही नहीं थे। रामशरण जोशी जैसे लोगों नें प्रदेश का जैसा चित्र उकेरा था वे वैसा ही सोंचते थे।
हम यह नहीं कहते कि हमारे अकेले के प्रयासों से किसी की छवि बन या बिगड़ सकती है किन्तु हमें आत्म संतुष्टि तो अवश्य मिलती है कि हमने प्रयास तो किया। इसी तारतम्य में मैं यह विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा कि मेरे इस ब्लॉग के फीड सब्सक्राईबर हैं आदरणीय श्री आनंद कुमार भट्ट जी, वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं एवं भारतीय प्रशासनिक अभिकरण में भी रहे हैं. उन्होंनें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कलेक्टर के पद पर एवं बस्तर के कमिश्नर के रूप में कार्य किया है. उनके जैसे छत्तीसगढ़ के भूगोल से परे मेरे इस ब्लॉग के कई और पाठक होंगें जिन्हें मैं नहीं जानता किन्तु ऐसे एक पाठक भी यदि हों तो लगता है कि हमारा यह ब्लॉगिंग प्रयास सफल है।
हम यह नहीं कहते कि हमारे अकेले के प्रयासों से किसी की छवि बन या बिगड़ सकती है किन्तु हमें आत्म संतुष्टि तो अवश्य मिलती है कि हमने प्रयास तो किया। इसी तारतम्य में मैं यह विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा कि मेरे इस ब्लॉग के फीड सब्सक्राईबर हैं आदरणीय श्री आनंद कुमार भट्ट जी, वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं एवं भारतीय प्रशासनिक अभिकरण में भी रहे हैं. उन्होंनें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कलेक्टर के पद पर एवं बस्तर के कमिश्नर के रूप में कार्य किया है. उनके जैसे छत्तीसगढ़ के भूगोल से परे मेरे इस ब्लॉग के कई और पाठक होंगें जिन्हें मैं नहीं जानता किन्तु ऐसे एक पाठक भी यदि हों तो लगता है कि हमारा यह ब्लॉगिंग प्रयास सफल है।
खान बहादुर हाफिज मोहम्मद विलायतउल्ला बस्तर में दीवान थे जिनके बेटे मोहम्मद हिदायतउल्ला ने 1922 में गवर्नमेन्ट हाई स्कूल रायपुर तथा चार वर्ष बाद मॉरिस कॉलेज नागपुर से पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर भारत के प्रथम मुस्लिम मुख्य न्यायाधीश बने। वे देश के कार्यकारी राष्ट्रपति और फिर उपराष्ट्रपति भी बने। रायपुर के बैरन बाजार इलाके में अकबर मंजिल से लगी हुई आलीशान हक मंजिल थी। पत्थरों की मजबूत दीवारों और सुंदर सीढ़ियों के कारण इस भवन की सुंदरता थी। इसके मालिक हक साहब मोहम्मद हिदायतउल्ला के पिता के पहले बस्तर में दीवान थे। मोहम्मद हिदायतउल्ला साहब इसी घर में रहते थे, हक साहब के परिवार के वारिस या तो जीवित नहीं बचे या बैरन बाज़ार के कुछ अन्य परिवारों की तरह पाकिस्तान चले गये। नीलामी के बाद अलग-अलग हाथों से होता हुआ भवन हाल ही में गिरा दिया गया। हमें इस बात की खुशी है कि मोहम्मद हिदायतउल्ला साहब के नाम को अक्षुण रखते हुए प्रदेश में रायपुर को केन्द्रीय विधि महाविद्यालय मिला.