बस्तर लोक के चितेरे हरिहर-खेम वैष्णव को हर वो शख्श जानता है जो छत्तीसगढ़ के बस्तर से प्रेम करता है। बस्तर संस्कृति, भाषा व परम्पराओं के दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण-सर्वधन में वैष्णव परिवार के योगदान के संबंध में हिन्दी इंटरनेट के पन्नों में ज्यादा जानकारी नहीं है, मैं इस सम्माननीय परिवार के मेरे मित्र हेमंत वैष्णव से इस संबंध में समय-समय पर अनुरोध करते रहा हूँ कि इंटरनेट में आदरणीय हरिहर-खेम वैष्णव के कार्यों की जानकारी डाली जाए, भाई हेमंत इंटरनेट तकनीकि से अनभिज्ञता का हवाला देते हुए हमेशा इस अहम कार्य को टालते रहे हैं। अभी कुछ दिनों से साहित्य शिल्पी में आदरणीय हरिहर वैष्णव जी की लेखनी एवं छत्तीसगढ़ के ब्लॉगों में उनकी टिप्पणी देखने को मिल रही है जिससे हमें कुछ आश बंधी है। इसी संबंध में चर्चा करते हुए लोक संस्कृति से सरोकार रखने वाले भाई हेमंत वैष्णव जी ने अपनी लिखी कुछ क्षणिकायें हमें सुनाई जिसे हम अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं, बस्तर के छत्तीसगढ़ी-हल्बी-भतरी पारिवारिक परिवेश से जुड़े हेमंत की क्षणिकायें आपको कैसी लगी बिना लाग लपेट टिप्पणियों के माध्यम से बतायें - 1
बच्ची ब्याही
चिता जली
बच्ची की बच्चे के साथ
2
मालिक की लात
सम्मान
पेट की लात से
3
तपती भट्ठी की ईंट
आग नहीं
पका पेट की आँच से
4
चिलो ने नोचा
गुंगी से बची
थाने की आबरू
5
सम्वेदना की चिता
धू - धू जल रही
नैतिकता की लकड़ी
6
आशियाने मे आड़े आता
किश्तों में
कटे बूढ़े बरगद
7
पढ़ा राजनीति साहित्य
देखा
साहित्य में राजनीति
8
फाईल
घोप दिए कलम, जब
घनघनाई घण्टी सत्ता की
9
मरणोपरान्त चंद रूपया
हिसाब
सियासत के नामों का
10
सम्मान आदिवासी कल्याण
टिंग - टांग
किवाड़ खोलती आदिवासी बाला
हेमन्त वैष्णव
रायपुर (छत्तीसगढ़)