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जून, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छत्‍तीसगढ़ की कला, साहित्‍य एवं संस्‍कृति पर संजीव तिवारी एवं अतिथि रचनाकारों के आलेख

लूट का बदला लूट: चंदैनी-गोंदा

  विजय वर्तमान चंदैनी-गोंदा को प्रत्यक्षतः देखने, जानने, समझने और समझा सकने वाले लोग अब गिनती के रह गए हैं। किसी भी विराट कृति में बताने को बहुत कुछ होता है । अब हमीं कुछ लोग हैं जो थोड़ा-बहुत बता सकते हैं । यह लेख उसी ज़िम्मेदारी के तहत उपजा है...... 07 नवम्बर 1971 को बघेरा में चंदैनी-गोंदा का प्रथम प्रदर्शन हुआ। उसके बाद से आजपर्यंत छ. ग. ( तत्कालीन अविभाजित म. प्र. ) के लगभग सभी समादृत विद्वानों, साहित्यकारों, पत्रकारों, समीक्षकों, रंगकर्मियों, समाजसेवियों, स्वप्नदर्शियों, सुधी राजनेताओं आदि-आदि सभी ने चंदैनी-गोंदा के विराट स्वरूप, क्रांतिकारी लक्ष्य, अखण्ड मनभावन लोकरंजन के साथ लोकजागरण और लोकशिक्षण का उद्देश्यपूर्ण मिशन, विस्मयकारी कल्पना और उसका सफल मंचीय प्रयोग आदि-आदि पर बदस्तूर लिखा। किसी ने कम लिखा, किसी ने ज़्यादा लिखा, किसी ने ख़ूब ज़्यादा लिखा, किसी ने बार-बार लिखा। तब के स्वनामधन्य वरिष्ठतम साहित्यकारों से लेकर अब के विनोद साव तक सैकड़ों साहित्यकारों की कलम बेहद संलग्नता के साथ चली है। आज भी लिखा जाना जारी है। कुछ ग़ैर-छत्तीसगढ़ी लेखक जैसे परितोष चक्रवर्ती, डॉ हनुमंत नायडू जैसों

हिन्दी ब्लाग प्रवेशिका 3 : ब्लाग टूल

आपने देखा होगा कि कई ब्‍लागर अपने ब्‍लाग के साईडबार में विभिन्‍न टूल का प्रयोग करते हैं जिससे उन्‍हें अपने ब्‍लाग के प्रमोशन में सहायता मिलती है वहीं उन टूलों से ब्‍लाग की सजावट भी हो जाती है । आज हम नये ब्‍लागर्स के लिये ब्‍लाग प्रमोशन के कुछ टूलों के संबंध में जानकारी प्रदान कर रहे हैं - ब्‍लाग का पंजीकरण : ब्‍लाग निर्माण एवं उस पर पठनीय सामाग्री डालने के बाद भी यह आवश्‍यक नहीं होता कि पाठक आपके ब्‍लाग तक सीधे यूआरएल टाईप कर के आयें । इसके लिए हमें लोकप्रिय फीड एग्रीगेटरों में पंजीकरण कराना आवश्‍यक होता है क्‍योंकि ज्‍यादातर पाठक इन्‍हीं फीड एग्रीगेटर वेबसाईटों के माध्‍यम से आपके ब्‍लाग तक पहुचते हैं । अंग्रेजी ब्‍लागों के लिए ढेरों फीड एग्रीगेटर व ब्‍लाग डायरेक्‍ट्री मौजूद हैं किन्‍तु हिन्‍दी ब्‍लागों के लिए अभी बहुत कम ब्‍लाग फीड एग्रीगेटर हैं । आप नीचे दिये गये फीड एग्रीगेटरों के वेबसाईटों में जाकर वहां दिये गये पंजीयन प्रक्रिया को पूर्ण कर अपने ब्‍लाग का पंजीयन करा सकते हैं - http://narad.akshargram.com http://unmukt.tumblr.com http://chitthajagat.in http://blogv

भूमकाल : बस्तर का मुक्ति संग्राम

भारत स्‍वतंत्रता आन्‍दोलन की 150 वीं वर्षगांठ मना रहा है । भारत के कोने कोने से 18 वीं सदी में अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में उठी चिंगारियों से देश रूबरू हो रहा है । नृत्‍य, नाटिका, कविता, लेख व कहानियों के द्वारा इस महान व पवित्र संग्राम की गाथाओं को प्रस्‍तुत किया जा रहा है और हम पूर्ण श्रद्धा से उन अमर सेनानियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्‍यक्‍त कर रहे हैं । छत्‍तीसगढ की धरती भी इस स्‍वतंत्रता आंदोलन के महायज्ञ में अपनी आहुति देती रही जिसके संबंध में इन दिनों लगातार लिखा गया और राज्‍य के श्रेष्‍ठ मंच निर्देशकों के द्वारा इसे मंचस्‍थ भी किया गया । 17 वीं एवं 18 वीं सदी के छत्‍तीसगढ की हम बात करें तो यह बहुसंख्‍यक आदिवासी जनजातियों का गढ रहा है और धान, खनिज व वन संपदा से भरपूर होने के कारण अंग्रेज सन् 1774 से लगातार इस सोन चिरैया पर आधिपत्‍य जमाने का प्रयास करते रहे हैं जिसमें आदिवासी, वन व खनिज बाहुल्‍य बस्‍तर अंचल का भूगोल भी रहा है जहां की भौतिक, आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों नें ‘परदेशियों’ को आरंभ से ललचाया है । बस्‍तर वनांचल क्षेत्र रहा है जहां सदियों से पारंपरिक जनजातियां मंजरों

पत्रकारिता व साहि‍त्य के ऋषि पं. माधवराव सप्रे

राजा राममोहन राय नें आधुनिक भारतीय समाज के निर्माण में जो चिंगारी जगाई थी उसके वाहक के रूप में छत्‍तीसगढ में वैचारिक सामाजिक क्रांति के अलख जगाने का काम किसी नें पूरी प्रतिबद्धता से किया है तो निर्विवाद रूप से यह कहा जायेगा कि वह छत्‍तीसगढ के प्रथम पत्रकार व हिन्‍दी की प्रथम कहानी एक टोकरी भर मिट्टी के रचईता पं. माधवराव सप्रे जी ही थे । इन्‍होंनें छत्‍तीसगढ के पेंड्रा से ‘ छत्‍तीसगढ मित्र ’ पत्रिका का प्रकाशन सन् 1900 में सुप्रसिद्ध स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री वामन राव लाखे के सहयोग से आरंभ किया था । 19 जून 1871 को मध्‍य प्रदेश के दमोह जिले के ग्राम पथरिया में जन्‍में पं. माधवराव सप्रे जी का संपूर्ण जीवन अभावग्रस्‍त एवं संघर्षमय रहा । सन् 1874 में बालक माधवराव छत्‍तीसगढ के बिलासपुर में अपने पितातुल्‍य बडे भाई बाबूराव के पास अपने माता पिता के साथ आये और संपूर्ण छत्‍तीसगढ को कृतज्ञ कर दिया । इनकी प्राथमिक व माध्‍यमिक शिक्षा बिलासपुर एवं उच्‍चतर माध्‍यमिक शिक्षा रायपुर से हुई । पढाई में कुशाग्र बालक माधवराव को आरंभ से ही छात्रवृत्ति प्राप्‍त होने लगी थी । रायपुर में अध्‍ययन के दौ

ब्लागर्स प्रोफाईल में अपने लम्बे ब्लाग लिस्ट में से कुछ को ही दिखाना

आजकल हिन्‍दी ब्‍लागर्स अनेक विधा में लगातार लिख रहे हैं और गूगल बाबा की कृपा से एक से अधिक ब्‍लाग बना कर हिन्‍दी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रस्‍तुत कर रहे हैं । कई हिन्‍दी ब्‍लागर्स तो सभी ब्‍लागों में नियमित तौर पर पोस्‍ट पब्लिश कर रहे हैं पर हमारे जैसे कुछ हिन्‍दी ब्‍लागर्स कई ब्‍लाग तो बना लिये हैं पर उन्‍हें नियमित अपडेट नहीं कर पा रहे हैं । ऐसे में एक मुख्‍य ब्‍लाग के अतिरिक्‍त अन्‍य ब्‍लाग भी लाईन से हमारे प्रोफाईल में नजर आते रहते हैं । इन्‍हें प्रोफाईल से हटाने का साधन आरंभिक तौर पर हमें ब्‍लाग डिलीट करना ही समझ में आता था । पर ऐसे में हमारे पसंद के ब्‍लाग यूआरएल सदा सदा के लिये समाप्‍त हो जाते है और डिलीट होने के कारण भविष्‍य में उपयोग के लिये इसे बचाया नहीं जा सकता । इसका दूसरा तरीका है वह यह है कि हम अपने दूसरे आई डी से ब्‍लाग बनायें पर ऐसे में गूगल एड सेंस की चवन्‍नी अट्ठन्‍नी से सौ डालर तक का सफर एक आई डी में चालीस तो दूसरे आई डी में साठ पहुचकर भी शुरू नहीं हो पाता । इस समस्‍या का हल हमें ब्‍लागर्स प्रोफाईल में ही नजर आया जिसे हम आपके लिये प्रस्‍तुत कर रहे हैं । जब हम

ब्लागर्स डाट काम में पसंदीदा फीड एग्रीगेटर बनाना आसान

यदि आप स्वयं अपने पसंद के ब्लागों का फीड एग्रीगेटर बनाना चाहते हैं तो लेआउट पेज में एड पेज एलीमेंट के ब्‍लाग लिस्‍ट को एड कर बना सकते हैं । यह नई सुविधा फीड के अन्‍य विकल्‍पों के साथ उपलब्‍ध है । इस संबंध में जानकारी मेरे पिछले पोस्‍ट में दी गई है । इसी सुविधा को उपयोग करते हुए मैंनें छत्‍तीसगढ ब्‍लाग एग्रीगेटर बनाने का प्रयास किया है, आप भी देखें एवं इस सुविधा का लाभ उठायें । संजीव तिवारी

भारतेन्दु युगीन साहित्यकार गोविंद साव

भारतेन्दु युगीन साहित्यकार गोविंद साव प्रो. अश्विनी केशरवानी छत्तीसगढ़ में भारतेन्दु युगीन कवि, आलोचक और उपन्यासकार ठाकुर जगमोहनसिंह का साहित्यिक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने सन~ 1880 से 1882 तक धमतरी में और सन~ 1882 से 1887 तक शिवरीनारायण में तहसीलदार और मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया है। यही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के बिखरे साहित्यकारों को जगन्मोहन मंडल बनाकर एक सूत्र में पिरोया और उन्हें लेखन की सही दिशा भी दी। जगन्मोहन मंडल कांशी के भारतेन्दु मंडल की तर्ज में बनी एक साहित्यिक संस्था थी। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के साहित्यकार शिवरीनारायण में आकर साहित्य साधना करने लगे। उस काल के अन्यान्य साहित्यकारों के शिवरीनारायण में आकर साहित्य साधना करने का उल्लेख तत्कालीन साहित्य में हुआ है। इनमें रायगढ़ के पं. अनंतराम पांडेय, रायगढ़-परसापाली के पं. मेदिनीप्रसाद पांडेय, बलौदा के पं. वेदनाथ श्‍वर्मा, बालपुर के मालगुजार पं. पुरूसोत्तम प्रसाद पांडेय, बिलासपुर के जगन्नाथ प्रसाद भानु, धमतरी के काव्योपाध्याय हीरालाल, बिलाईगढ़ के पं. पृथ्वीपाल तिवारी और उनके अनुज पं. गणेश तिवारी और शिवरीन

हिन्दी ब्ला‍ग प्रवेशिका 2 : एड पेज एलीमेंट

ब्‍लाग बना लेने के बाद प्रत्‍येक ब्‍लागर्स चाहता है कि ब्‍लाग के हेडर, फूटर व साईड बार में चित्र, लिंक व टेक्‍स्‍ट आदि लगाये । इसके लिये ब्‍लागर्स डाट काम लेआउट पेज में एड पेज एलीमेंट (पृष्‍ट तत्‍व जोडें) की सुविधा प्रदान करता है । इसके द्वारा ब्‍लागर्स अपने ब्‍लाग को सजाते हुए आवश्‍यक लिंक, ब्‍लागरोल, गजट, फोटो आदि अपने ब्‍लाग में लगा सकते है । हम यहां संपूर्ण एड पेज एलीमेंट की जानकारी क्रमिक रूप से प्रस्‍तुत कर रहे हैं । इसके पूर्व हमने हिन्‍दी ब्‍लाग प्रवेशिका 1 मे न्‍यू पोस्‍ट पेज के अवयवों के संबंध में पूर्ण जानकारी प्रस्‍तुत कर चुके हैं । ब्‍लाग लेआडट हमारे ब्‍लाग के परदे के पीछे का हिस्‍सा है यहां आपके मौजूदा ब्‍लाग में जोडे जा सकने योग्‍य स्‍थान पर ही ‘ एड पेज एलीमेंट (पृष्‍ट तत्‍व जोडें) ’ दर्शित होता है । जैसे ही हम डैशबोर्ड – लेआउट में एड पेज एलीमेंट पृष्‍ट तत्‍व जोडें को क्लिक करते हैं एक नया विंडो खुलता है जिसे उपरोक्‍त चित्र में दिखाया गया है । इसमें विभिन्‍न प्रकार के 16 पृष्‍ट तत्‍वों का खाका आईकान के साथ उपलब्‍ध होता है । जैसे ही हम इस नये विंडो में उस तत्‍व

हिन्दी ब्लाग प्रवेशिका 1 : ब्लाग में न्यू पोस्ट के विकल्पों की जानकारी

आपने सफलतापूर्वक अपना ब्‍लाग बना लिया है और गूगल के हिन्‍दी टूल के माध्‍यम से हिन्‍दी में पोस्‍ट भी पब्लिश कर लिया है । इसके बावजूद कई नये ब्‍लागर्स, पोस्‍ट तो नियमित तौर पर पब्लिश कर लेते हैं किन्‍तु उन्‍हें न्‍यू पोस्‍ट पेज के अवयवों के संबंध में पूर्ण जानकारी नहीं होती । इसलिये नये ब्‍लागर्स की सुविधा के लिये हम यहां पोस्टिंग संबंधी संपूर्ण जानकारी क्रमिक रूप में प्रस्‍तुत कर रहे हैं :- जब आप अपने ब्‍लाग में कोई नई प्रवृष्टि करने के लिये साईन इन – डैशबोर्ड – न्‍यू पोस्‍ट में आते हैं तो वहां इस चित्र के अनुसार पोस्‍ट विंडो के अतिरिक्‍त 20 विकल्‍प प्राप्‍त होते हैं जिसका विवरण इस प्रकार है - (पूर्ण आकार के लिये फोटो को क्लिक करें) 1 पोस्‍ट शीर्षक : पोस्‍ट करने के पूर्व अपनी सामाग्री का शीर्षक यहां लिखें जो आपके ब्‍लाग में मोटे अक्षरों से इस प्रवृष्टि के लिंक सहित प्रदर्शित होगा । ब्‍लाग में इसी शीर्षक को क्लिक करने पर पोस्‍ट की जाने वाली सिर्फ यह सामाग्री ही प्रदर्शित होगी एवं इसके नीचे इस प्रवृष्टि पर की गई टिप्‍पणियां भी प्रदर्शित होगी । कई बार देखा जाता है कि कि ब्‍लाग