मेरे मन की भाषा हिन्दी
मेरे बोल की भाषा हिन्दी।
सबसे सहज, सबसे सरल
सबसे मीठी, हमारी हिन्दी।।
झरने के कल—कल सी हिन्दी
कोयल के मीठे कूक सी हिन्दी।
मिट्टी की सौंधी महक सी हिन्दी
हवा के शीतल बयार सी हिन्दी।।
सूर—रहीम के दोहे में हिन्दी
कबीर—मीरा के साखों में हिन्दी।
निराला, प्रसाद और पंत की हिन्दी
गीत, गज़ल और कविता की हिन्दी।।
मॉं की लोरी—थपकी में हिन्दी
बाबा की झिड़की में हिन्दी।
नानी की कहानियों में हिन्दी
दादा के हर सीख में हिन्दी।।
राष्ट्र गौरव की भाषा हिन्दी
हम सब की अभिलाषा हिन्दी।
मैथिली, उर्दू, अवधी और ब्रज
सबको अपने में मिलाती हिन्दी।।
भारत के माथे की बिन्दी
भारत की पहचान है हिन्दी।
दुनिया की सभी भाषा अच्छी
पर सबसे निराली हमारी हिन्दी।।
डॉ. हंसा शुक्ला
प्राचार्य, स्वामी स्वरूपानंद महाविद्यालय, हुडको भिलाई.मेरे बोल की भाषा हिन्दी।
सबसे सहज, सबसे सरल
सबसे मीठी, हमारी हिन्दी।।
झरने के कल—कल सी हिन्दी
कोयल के मीठे कूक सी हिन्दी।
मिट्टी की सौंधी महक सी हिन्दी
हवा के शीतल बयार सी हिन्दी।।
सूर—रहीम के दोहे में हिन्दी
कबीर—मीरा के साखों में हिन्दी।
निराला, प्रसाद और पंत की हिन्दी
गीत, गज़ल और कविता की हिन्दी।।
मॉं की लोरी—थपकी में हिन्दी
बाबा की झिड़की में हिन्दी।
नानी की कहानियों में हिन्दीदादा के हर सीख में हिन्दी।।
राष्ट्र गौरव की भाषा हिन्दी
हम सब की अभिलाषा हिन्दी।
मैथिली, उर्दू, अवधी और ब्रज
सबको अपने में मिलाती हिन्दी।।
भारत के माथे की बिन्दी
भारत की पहचान है हिन्दी।
दुनिया की सभी भाषा अच्छी
पर सबसे निराली हमारी हिन्दी।।
डॉ. हंसा शुक्ला
