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अगस्त, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छत्‍तीसगढ़ की कला, साहित्‍य एवं संस्‍कृति पर संजीव तिवारी एवं अतिथि रचनाकारों के आलेख

लूट का बदला लूट: चंदैनी-गोंदा

  विजय वर्तमान चंदैनी-गोंदा को प्रत्यक्षतः देखने, जानने, समझने और समझा सकने वाले लोग अब गिनती के रह गए हैं। किसी भी विराट कृति में बताने को बहुत कुछ होता है । अब हमीं कुछ लोग हैं जो थोड़ा-बहुत बता सकते हैं । यह लेख उसी ज़िम्मेदारी के तहत उपजा है...... 07 नवम्बर 1971 को बघेरा में चंदैनी-गोंदा का प्रथम प्रदर्शन हुआ। उसके बाद से आजपर्यंत छ. ग. ( तत्कालीन अविभाजित म. प्र. ) के लगभग सभी समादृत विद्वानों, साहित्यकारों, पत्रकारों, समीक्षकों, रंगकर्मियों, समाजसेवियों, स्वप्नदर्शियों, सुधी राजनेताओं आदि-आदि सभी ने चंदैनी-गोंदा के विराट स्वरूप, क्रांतिकारी लक्ष्य, अखण्ड मनभावन लोकरंजन के साथ लोकजागरण और लोकशिक्षण का उद्देश्यपूर्ण मिशन, विस्मयकारी कल्पना और उसका सफल मंचीय प्रयोग आदि-आदि पर बदस्तूर लिखा। किसी ने कम लिखा, किसी ने ज़्यादा लिखा, किसी ने ख़ूब ज़्यादा लिखा, किसी ने बार-बार लिखा। तब के स्वनामधन्य वरिष्ठतम साहित्यकारों से लेकर अब के विनोद साव तक सैकड़ों साहित्यकारों की कलम बेहद संलग्नता के साथ चली है। आज भी लिखा जाना जारी है। कुछ ग़ैर-छत्तीसगढ़ी लेखक जैसे परितोष चक्रवर्ती, डॉ हनुमंत नायडू जैसों

लो भई छत्‍तीसगढ ब्‍लागर्स मीट की खबरें

नवोदित व प्राकृतिक सुन्‍दरता से भरपूर छत्‍तीसगढ में ब्‍लागर्स मीट की संभावना से हम उत्‍साहित थे, नीरज दीवान भाई (की बोर्ड के सिपाही)के रायपुर आने की सूचना पाकर हमने संजीत जी से भिलाई में यह मीट रखने के लिए आग्रह किया था क्‍योंकि हम मानते हैं कि ब्‍लागर्स मीट सिर्फ ब्‍लागर्स मीट न होकर ब्‍लागर्स अवेयरनेस मीट हो, इसके लिए हम ब्‍लाग दुनिया में आने के इच्‍छुक नये साथियों को भी उसी स्‍थान में बुलाकर नीरज भाई व छत्‍तीसगढ के ब्‍लागरों से मिलाना चाहते थे । आज सुबह से ही हम आश लगाये बैठे थे नीरज भाई एवं हमारे अन्‍य छत्‍तीसगढिया ब्‍लागर्स भाईयों से तय स्‍थान में मुलाकात हो । हम रायपुर में भी मिलने के लिए तैयार बैठे थे किन्‍तु संजीत भाई का फोन आया कि सभी ब्‍लागर्स अपनी अपनी निजी व्‍यस्‍तता के कारण रायपुर में भी जुट नहीं पा रहे हैं तब हमने भी अपने रायपुर जाने का कार्यक्रम निरस्‍त कर नीरज भाई से फोन पर बात किया शाम को 6.30 संध्‍या को मिलने का समय तय हुआ क्‍योंकि नीरज भाई को राजनांदगांव जाना था और रायपुर से राजनांदगांव जाने के लिए भिलाई बीच में पडता है, जहां वे हमसे मिलने को तैयार हो गये । हम 6.00

प्रथम प्रेम पत्र

मैं तरस रहा था तू देखे मेरी तरफ और मुस्‍कुरा दे, हौले से मैं तेरी इच्‍छा पे नही जाता कि, तुमने क्‍यू मुस्‍कुराया है ? पर, इतना जरूर जानता हूं कि, तुमने मुस्‍कुराया तो है । तेरी ये शोख अदा, इठलाना बुत सा खडे होना, दांतो में उंगली चबाना नजरों की चपलता मैं हैरान हूं, ये मामूली है या गैर मामूली ? मैं ये तो नही जानता पर, इतना जरूर जानता हूं कि, तेरी आंखों में कुछ तो है आंखों के सिवा । आकांक्षाओं का विशाल समुद्र किनारों से अठखेलियां करता हुआ या मैं, तेरी ओर ताकता हुआ ? मैं ये तो नही जानता पर, इतना जरूर जानता हूं कि, तुमने मुझे देखा है । पहली कविता नही है यह ऐसे कई लिख चुका हूं, तुम्‍हारे खातिर पेश है एक पुष्‍प मेरी बगिया का तुम्‍हे ये पसंद आया, या नही आया? मैं ये तो नही जानता पर, इतना जरूर जानता हूं कि, तुम किसी से मेरा शिकायत नही करोगी । कुछ लिखने की तमन्‍ना हो तो ठीक नही तो सिर्फ अपना पता लिखा खाली लिफाफा ही सहीं पत्र का इंतजार रहेगा मुझे तुम प्रेषक बनोगी या नहीं ? मैं ये तो नही जानता पर, इतना जरूर जानता हूं कि, मैने ये तुम्‍हारे लिए ही लिखा है

हिन्‍दी कम्‍यूटिंग : स्‍वप्‍न अधूरे हैं

बडे भाई शुकुल जी एवं ज्ञानदत्‍त जी के प्रेरणा से आरंभ यह् इंक ब्‍लागिंग हमारे लिए एक अच्‍छा साधन सिद्ध हुआ है । दिन भर कम्‍प्‍यूटर से दूर रहने का गम इसने दूर कर दिया ।

नारित्व का बोध

विगत दिनों चर्चा में रहे अमिताभ बच्चन की फिल्में क्रमश: नि:शब्द व चीनी कम जैसी फिल्मों के मूल भावों एवं फिल्म समीक्षा व विचार मंथनों में जवान पुरुष से ज्यादा ६० से अधिक उम्र के पुरुषों की कामुक प्रवृत्तियों पर खुलकर चर्चा हुई । सभी ने अपने-अपने मति के अनुसार इस पर अपने-अपने विचार प्रकट किए । हम फिल्म तो नहीं देख पाते पर इस पर चर्चाओं को कभी कभी पढते रहते हैं एवं फिल्म देखने का मजा उसी से लेते हैं । आज सुबह हम एक साध्वी के श्री मुख से दूरदर्शन में प्रवचन सुन रहे थे, उन्होंने उपरोक्त मुद्दे का राज, पौराणिक कथाओं की माध्यम से खोला, हमारी भी आँखें खुल गई । लीजिए हम प्रस्तुत कर रहे हैं उस कथा को जो कथा नहीं चिंतन है, भाव उनके है शब्द हमारे:- एक बार एक सरोवर में राजकन्यायें निर्वस्त्र होकर जल क्रीड़ा का आनंद ले रही थी । महर्षि वेद व्यास का युवा साधु पुत्र ऋषि पाराशर वहाँ से गुजरे, ऋषि ने जलक्रीड़ा करती हुई उन नग्न बालाओं को देखा और अपना कमंडल उठाये आगे बढ गए, युवतियाँ स्नान करती रहीं । थोड़ी देर पश्चात स्वयं महर्षि वेद व्यास जी उसी पथ से गुजरे, उन्होंने भी जलक्रीड़ा में मग्न, नग्न बाला

आजादी के दिन का समाचार पत्र : धरोहर

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये छत्तीसगढ के दुर्ग मे आज भी है आजादी के दिन का समाचार पत्र जिसे सम्हाला है सक्सेरिया परिवार ने धरोहर की तरह. 15 अगस्त को स्वराज्य के सूर्योदय से दिल्ली मे रौनक 9 अगस्त को दैनिक विश्वामित्र , मुम्बई से प्रकाशित समाचार पत्र का वह ऐतिहासिक समाचार जो लोगों के मन में उत्‍साह व रोमांच भर रहा था । तब सोने की कीमत थी 98.25 रु. प्रति तोला व चान्दी का भाव था 157.25 रु.प्रति किलो . मुम्बई मे तब नीलकमल फिल्म लगी थी ! और भी कई रोचक व एतिहासिक पलो को याद करने को विवश करते इस समाचार पत्र का चित्र हम यहा प्रस्तुत कर रहे है . हर दौर मे छत्तीसगढ के सपूतो के बलिदान, त्याग और समर्पण से मजबूत हुआ मेरा भारत आज मै इस पावन बेला पर भाई संजीत त्रिपाठी के स्वर्गीय पिता श्री मोती लाल जी त्रिपाठी, छत्तीसगढ के वरिष्ठ स्वतंत्रता सग्राम सेनानी एवं मेरे श्वसुर जो स्व.त्रिपाठी जी के ग्रुप के कनिष्ठ सदस्य थे, स्व. श्री लक्ष्‍मण प्रसाद जी दुबे स्वतंत्रता सग्राम सेनानी को शत शत नमन करता हू ! उनका सम्पूर्ण जीवन आदर्श रहा उनका सन्देश निदा फाजली के इस शेर मे देखें - हरेक घर म

छत्तीसगढ़ के ज्योतिर्लिंग : प्रो. अश्विनी केशवानी

प्राचीन छत्‍तीसगढ पर दृश्टिपात करें तो हमें इस क्षेत्र में जहां वैष्णव मंदिर बहुतायत में मिलते हैं, वहीं भव्‍य मंदिर अपनी गौरव गाथा कहते नहीं अघाते। छत्‍तीसगढ प्राचीन काल से आज तक अनेक धार्मिक आयोजनों का समन्वय स्थल रहा है। गांवों में स्कूल-कालेज न हो, हाट बाजार न हो, तो कोई बात नहीं, लेकिन नदी-नाले का किनारा हो या तालाब का पार, मंदिर चाहे छोटे रूप में हों, अवश्‍य देखने को मिलता है। ऐसे मंदिरों में शिव, हनुमान, राधाकृष्‍ण और रामलक्ष्मणजानकी के मंदिर प्रमुख होते हैं। प्राचीन काल से ही यहां शैव परम्परा बहुत समृद्ध थी। कलचुरि राजाओं ने विभिन्न स्थानों में शिव मंदिर का निर्माण कराया जिनमें चंद्रचूड़ महादेव (शिवरीनारायण), बुद्धेश्‍वर महादेव (रतनपुर), पातालेश्‍वर महादेव (अमरकंटक), पलारी, पुजारीपाली, गंडई-पंडरिया के शिव मंदिर प्रमुख हैं। इसके समकालीन कुछ शिवमंदिर और बने जिनमें पीथमपुर का कालेश्‍वरनाथ, शिवरीनारायण में महेश्‍वरनाथ प्रमुख हैं। भगवान शिव अक्षर, अव्यक्त, असीम, अनंत और परात्पर ब्रह्म हैं। उनका देव स्वरूप सबके लिए वंदनीय है। शिवपुराण के अनुसार सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भगवान

इस तुच्‍छ विजय पर इतना अभिमान

कलिंग विजय के उपरांत सम्राट अशोक अपनी सफलतम विजय यात्राओं के कारण अहंकार से परिपूर्ण हो गया था. और चाटुकारों की दिन रात प्रशंसा और चारण सुन सुनकर, वह अपने आप को बहुत बुद्धिमान, सर्वशक्तिमान व सफल सम्राट मानने लगा था । एक बार राजधानी पाटलीपुत्र में बौद्धभिक्षु आचार्य उपगुप्त का आगमन हुआ. चांदनी रात में सम्राट उनसे मिलने गये. आचार्य का अभिवादन करते हुए अशोक का दंभ विद्यमान था, उन्‍होंने कहा- विश्‍व का सर्वशक्तिमान शासक सम्राट अशोक आपको प्रणाम करता है । आचार्य विद्वान थे उनसे कुछ छुपा नहीं था और फिर सम्राट अशोक के कथन में छिपे अहंकार तो स्पष्ट परिलक्षित था । आचार्य ने उनके शब्दों में छिपे दंभ को पहचान लिया । उन्होंने शांतिपूर्वक आसमान की ओर ताकते हुए सम्राट अशोक से कहा - राजन ! वह आकाशगंगा देख रहे हैं ? क्या आप जानते हैं, इसमें छोटे-छोटे दिखने वाले अनगिनत तारों में से कुछ तारों का आकार हमें दिखाई पड़ने वाले सूर्य से भी हजारों गुना बड़ा है । अशोक ने सहमति से सिर हिलाया । आचार्य ने कहा- और तुम यह भी मानते हो ना कि जिस राज्य पर तुमने विजय प्राप्त की, वह तो इस पृथ्वी का बहुत छोटा सा टुकड़ा मा

श्रावण मास भगवान शिव के आराधना का मास

श्रावण का मास भगवान शिव के आराधना का मास है, जनश्रुति व शास्‍त्रोक्‍त मतानुसार श्रावण मास में आदिदेव भगवान शंकर की आराधना से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है । हमारे हिन्‍दी चिट्ठा समूह में अलखवाडा नें हमारे शिव मंत्रों व स्‍तोत्रों को हमारे सम्‍मुख प्रस्‍तुत कर के बडा उपकार किया है मैं अलखवाडा के श्रृजनकर्ता को प्रणाम करता हूं । आप भी खोजें इंटरनेट संसार में भगवान शिव से शिवोहम होने का राह । हम आपको अपने मानस में गुंजायमान शिव के स्‍तोत्रों की संक्षिप्‍त बानगी प्रस्‍तुत कर रहे हैं :- ब्रह्ममुरारी सुरार्चित लिंगं, बुद्धी विवरधन कारण लिंगं। संचित पाप विनाशन लिंगं, दिनकर कोटी प्रभाकर लिंगं। ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं॥1।। देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गम् कामदहम् करुणाकर लिङ्गम् . रावणदर्पविनाशनलिङ्गम् तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् .. २.. सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गम् बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् . सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गम् तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् .. ३.. कनकमहामणिभूषितलिङ्गम् फनिपतिवेष्टित शोभित लिङ्गम् . दक्षसुयज्ञ विनाशन लिङ्गम् तत् प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् .. ४.. कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गम् पङ्कजहारस

हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा : अनुगूँज 22

(चित्र बडा करके पढे) हमने फुरसद के क्षणों में भईया फुरसतिया की बातों को मानते हुए परयास किया है आशा है आपको भी पसंद आयेगा । टैगः rel="tag">anugunj , href="http://technorati.com/tag/अनुगूँज" rel="tag">अनुगूँज

भोजली : मित्रता की मिसाल

भोजली एक लोकगीत है जो श्रावण शुक्‍ल नवमी से रक्षाबंधन के बाद तक छत्तीसगढ़ के गांव गांव में भोजली बोने के साथ ही गूंजती है और भोजली माई के याद में पूरे वर्ष भर गाई जाती है । छत्तीसगढ़ में बारिस के रिमझिम के साथ कुआरी लडकियां एवं नवविवाहिता औरतें भोजली गाती है। दरअसल इस समय धान की बुआई व प्रारंभिक निदाई गुडाई का काम खेतों में समाप्ति की ओर रहता है और कृषक की पुत्रियां घर में अच्‍छे बारिस एवं भरपूर भंडार फसल की कामना करते हुए फसल के प्रतीकात्‍मक रूप से भोजली का आयोजन करती हैं । भोजली एक टोकरी में भरे मिट्टी में धान, गेहूँ, जौ के दानो को बो कर तैयार किया जाता है । उसे धर के किसी पवित्र स्‍थान में छायेदार जगह में स्‍थापित किया जाता है । दाने धीरे धीरे पौधे बनते बढते हैं, महिलायें उसकी पूजा करती हैं एवं जिस प्रकार देवी के सम्‍मान में देवी की वीरगाथाओं को गा कर जवांरा – जस – सेवा गीत गाया जाता है वैसे ही भोजली दाई के सम्‍मान में भोजली सेवा गीत गाये जाते हैं । सामूहिक स्‍वर में गाये जाने वाले भोजली गीत छत्‍तीसगढ की शान हैं । महिलायें भोजली दाई में पवित्र जल छिडकते हुए अपनी कामनाओं को भोजली से

छत्तीसगढ़ी लोक जीवन में वर्षा : प्रो. अश्विनी केशरवानी

छत्तीसगढ़ का अधिकांश भूभाग मैदानी है इसलिए यहां के जन जीवन में वर्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। क्योंकि यहां का लोक जीवन कृषि पर आधारित है। यही कारण है कि वर्षा ऋतु का जितनी बेसब्री से छत्तीसगढ़ में इंतजार होता है अन्यत्र कहीं नहीं होता ? वर्षा की पहली फुहार से मिट्टी की सोंधी महक यहां के लोक जीवन को प्रफुल्लित कर देता है। सब लोग नाचते गाते वर्षा की पहली फुहार का स्वागत करते हैं :- झिमिर झिमिर बरसे पानी, देखो रे संगी, देखो रे साथी। श्रीरामचरित मानस के किष्किंधा कांड में तुलसी दास जी ने लिखा है- 'वर्षा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए।।'' श्रीरामचंद्र जी अनुज लक्ष्मण से कहते हैं कि वर्षा काल में आकाश में छाए बादल गरजते हुए बहुत ही सुहावने लगते हैं। वे आगे कहते हैं कि हे लक्ष्मण ! देखो मोरों के झुंड बादलों को देखकर नाच रहे हैं- 'लछिमन देखु मोर गन नाचत बारिद पेखि।' कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में अकरस जोताई कर वर्षा का इंतजार कर रहे किसान का मन पानी बरसने से मोर की तरह नाच उठता है। प्रसन्न मन से वह खेती-किसानी में जुट जाता है। छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री प

कहां खो गया मेरा गांव

रचना, लेखन और प्रस्तुति # प्रो. अश्विवनी केशरवानी प्रो. अश्विनी केशरवानी केशरवानी जी के संबंध में Who's Who in Madhya Pradesh के 1997 संस्‍करण के पेज क्र. 229 में उल्‍लेख है यथा - जन्‍म : 18 अगस्‍त, 1958 ; शिक्षा : एमएससी (प्राणीशास्‍त्र) रचना : ललित निबंध, साहित्‍य और परंपरा के उपर स्‍वतंत्र लेखन । सम्‍मान : पाठक मंच एवं कादिम्‍बीनी क्‍लब द्वारा सम्‍मानित, केशरवानी सभा द्वारा सम्‍मानित । प्रकाशन : विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित । शबरीनारायण, जी हां ! लोग मुझे इसी नाम से जानते हैं। लोग मेरे नाम का विश्लेषण करते हुए कहते हैं कि जहां शबरी जैसी मीठे बेर चुनने वाली भीलनी और साक्षात् भगवान नारायण का वास हो, उस पतित पावन स्थान को ही शबरीनारायण कहते हैं। मेरी पवित्रता में चार चांद लगाती हुई चित्रोत्पला-गंगा (महानदी) बहती है। हालांकि वह गंगा के समान पवित्रता को समेटे हुए है। इसी महानता के कारण उसे महानदी कहते हैं। इससे मेरा मान बढ़ा है। कवि श्री धनसाय विदेह के मुख से :- धन्य धन्य शबरीनारायण महानदी के तीर। जहां कभी पद कमल धरे थे रामलखन दो वीर।। धन्य यहां की वसुन्धरा

स्‍पात माफियाओं के शिकंजे में भिलाई स्‍पात संयंत्र : इस सप्‍ताह की खबर

पढे और भी सनसनीखेज 4 से 10 अगस्‍त तक की साप्‍ताहिक खबरें छत्‍तीसगढ सवे रा में जिसे हमने पिछले सप्‍ताह ही चिट्ठा संसार में आप सब की प्रेरणा से उतारा है । आज प्रस्‍तुत है इसका द्वितीय चिट्ठा प्रति । संपूर्ण समाचारों को हमने इसमें डाला है, चित्रों को डालना शेष है, भविष्‍य में इसे और भी रूचिकर बनाने का प्रयास है । इस पर समय व श्रम अत्‍यधिक लग रहा है । हालांकि हम क्‍वार्क फाईलों को रवि रतलामी जी के सुझाये रूपांतर का प्रयोग कर यूनिकोड रूपांतर कर रहे हैं, परन्‍तु एक दिन में संपूर्ण साप्‍ताहिक को रूपांतरित करना एवं पोस्‍ट करना (लगभग पचास) कष्‍टप्रद है । आप सब का आर्शिवाद एवं प्रोत्‍साहन चाहता हूं । कृपया हमारे साप्‍ताहिक समाचार चिट्ठे पर आयें एवं उसका अवलोकन कर यहां हमें सुझाव देवें । छत्‍तीसगढ सवेरा का लिंक है : http://cgsavera.blogspot.com/

प्रेम मुक्ति है

मैं यानि अहंकार ! अहंकार और प्रेम में क्या संबंध हो सकता है । प्रेम तो अहंकार का विसर्जन है. जब भी किसी के प्रति प्रेम उगमता है, तो उसके प्रति हम अपना अहंकार छोड़ देते हैं, हम उसके प्रति अपने को समर्पित कर देते हैं. फिर वह प्रेम साधारण जगत का हो या भगवान के प्रति हो. मौलिक प्रक्रिया तो एक ही है. जिस स्त्री को तुमने प्रेम किया, या जिस पुरुष को तुमने प्रेम किया, उस प्रेम में तुम्हें परित्याग क्या करना पड़ता है ? प्रेम मांगता क्या है ? प्रेम एक ही चीज मांगता है कि मैं को समर्पित करो !और जब भी कोई पुरुष या स्त्री एक दूसरे के प्रति अपने को समर्पित कर देते हैं, तो उनके जीवन में बड़ी हरियाली के फूल खिलते हैं, बड़ी सुवास उठती है, मगर यह बहुत मुश्किल से होता है. क्योंकि आखिर पुरुष, पुरुष है और स्त्री, स्त्री है ! दोनों के लिए अपने मैं को, अपने अहंकार को छोड़कर स्वयं को समर्पित करना कठिन कार्य है. और कभी यह समर्पण जीवंत हो भी जाए तो वह क्षणभंगुर ही होता है, उस क्षण में थोड़ी सी झलक मिलती है- रस की, मन थोड़ा सा मुग्ध हो जाता है, थोड़े प्राण आनंदित भी हो जाते हैं- मगर कुछ क्षणों के लिए, और फिर वह

“पापा ये स्‍टेफ्री क्‍या होता है ?”

जून माह में निर्मल आनंद में फिल्‍म की चर्चा करते हुए श्रीयुत तिवारी जी कहते हैं - .. दूसरी है ३४ वर्षीय तब्बू.. वो तो खैर क्या कहें.. कटारी है कटारी.. देख के मन करता है.. बस कब मौका मिले और सेक्स कर लें उसके साथ.. क्यों आप का नहीं करता.. हमारा तो करता है.. अमिताभ का भी करता है.. आप लोगों से पूछा गया है कि क्‍या आप का नहीं करता ? हमें उस समय बेहद अटपटा लगा था । आज उन स्‍मृतियों को ताजा किया तो उनकी यह साफगोई दिल को छू गई, भरे समाज में इस बात को लेकर आये और कह दिये जो बढी दाढी से छुपी रह सकती थी । फिल्‍म तो हम नहीं देखे पर इधर उधर से जो जानकारी मिली उसके अनुसार से यह बडे लोगों की बडी बातें थी । किसी नें कहा नयी चिंतन को जन्‍म देती कहानी है । क्‍या है यह चिंतन, फिल्‍म व टीवी सीरियल वाले भरपूर कोशिस कर रहे हैं, नारी पुरूष उन्‍मुक्‍तता व स्‍वैच्‍छाचारिता की सहज (? पैशाचिक) प्रवृत्ति को अपने फिल्‍मों व लोकप्रिय सीरियलों में दिखायें ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके बच्‍चे भी जान सके कि अपनी मां के उदर से उत्‍पन्‍न भाई बहनों के अलग अलग पिता के संबंध में अपनी मां की वैचारिक स्‍वतंत्रता य

नेट चैट प्रेमालाप नें पंहुचाया जेल

छद्म नाम एवं झूठ फरेब से भरी नेट की दुनिया का एक सच भिलाई का एक छात्र नेट प्रेमिका से करोडपति पुत्र बनकर करता था चैट प्रेमिका को रायपुर एयरपोर्ट से नई कार में रिसीव करने व रहीसी को साबित करने किया खुद के अपहरण नाटक अपने ही बाप से मांगी पंद्रह करोड की फिरौती आप भी चित्र बडा कर पढे क्षेत्रीय समाचार पत्र नवभारत की रिपोर्टिंग Tags: छत्तीसगढ