ब्लॉग छत्तीसगढ़

01 January, 2014

सोमवार, 7 अक्तूबर 2013 भारत की राजनीति

भारत की राजनीति, राजनीतिक वातावरण और राजनीतिज्ञों के शुद्धिकरण की दिशा में अभी-अभी दो महत्वपूर्ण बातें हुई है। पहला - भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को अस्वीकृत करने का मतदाताओं को अधिकार देने की दिशा में पहल। दूसरा - दागी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सदस्यता समाप्त करने से संबंधित भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश को विफल करने के लिए सरकार द्वारा लाये गये अध्यादेश के विरूद्ध जन आक्रोश का राहुल गांधी द्वारा समर्थन करना और उसे फाड़कर नाली में बहाने की बात कहना। इससे बौखलाकर केन्द्र सरकार द्वारा इस अध्यादेश को वापस ले लिया गया है।

दागी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सदस्यता समाप्त करने से संबंधित भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश जारी होने के बाद अनेक मंत्रियों और राजनेताओं और राजनीतिक दल के प्रवक्ताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी है। किसी ने कहा कि हम जनप्रतिनिधि हैं, पुलिस का कोई भी सिपाही हमें कैसे गिरफ्तार कर सकता है? इस तरह का वक्तव्य देने वालों से पूछा जाय, क्या ये अपने लिए विशेष पुलिस बल चाहते हैं, जिसे ये अपने इशारों पर नचा सकें? वैसे भी पुलिस के कामकाज को प्रभावित करना इनके लिए कोई नई बात नहीं है। किसी ने कहा - हम दागी हैं, अपराधी हैं तो जनता हमें चुनती क्यों है? बेशर्मीपूर्वक इस तरह का तर्क (वास्तव में कुतर्क) देने वाले ये तुर्रमखान पहले यह बताएं कि चुनाव पंचार के दौरान क्या उन्हानें वोट की भीख अपने नाम पर मंगा था या अपनी पार्टी के नाम पर? यदि वोट की भीख इन लोगों ने अपने ही नाम पर मांगा था तो मांगते वक्त क्या इन लोगों ने अपने काले कारनामों और किए गये अपराधों को जनता के सामने प्रगट किया था?

सच्चाई तो यह है कि यहां के मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं बल्कि राजनीतिक पार्टी के पक्ष में अपना मत देते हैं। गांवों में ऐसे मतदाताओं की संख्या कम नहीं है जो आज भी अपना मत या तो इंदिरा माई को देते हैं या कि अटल बिहारी बाजपेई को। हर चुनाव में सभी राजनीतिक दल अपना-अपला चुनाव घोषण-पत्र जारी करते हैं। जनता अपना मत राजनीतिक दलों को उनके द्वारा जारी किये गए चुनावी घोषणा पत्र में किये गए वादों के आधार पर देती है। हम भलीभांति जानते हैं कि इन घोषण-पत्रों में लिखे गये अधिकांश लोकलुभावन वादों को कभी पूरा नहीं किया जाता है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों, जिनके लिए वे मत याचना करते हैं, की अच्छाइयों और बुराइयों को, उनके द्वारा किये गए अपराधों को जनता के सामने प्रगट क्यो नहीं करते हैं?

क्या अपनी असलियत को जनता की नजरों से छुपाकर, अथवा अपने उम्मीदवार की असलियत को जनता की नजरों से छुपाकर, झूठे वादों वाली चुनावी घोषणा-पत्र के आधार पर जनता से मतों की याचना करने वाले उम्मीदवारों और राजनीतिक दालों के विरूद्ध धोखा धड़ी और जनता को छलने के अपराध में चार सौ बीसी का अपराध पंजीबद्ध नहीं होना चाहिये?

कुबेर


16 जून 1956 को जन्‍में कुबेर जी हिन्‍दी एवं छत्‍तीसगढ़ी के सिद्धस्‍थ कलमकार हैं. उनकी प्रकाशित कृतियों में भूखमापी यंत्र (कविता संग्रह), उजाले की नीयत (कहानी संग्रह), भोलापुर के कहानी (छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह), कहा नहीं (छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह), छत्तीसगढ़ी कथा-कंथली (छत्ती़सगढ़ी लोककथा संग्रह) आदि हैं. माइक्रो कविता और दसवाँ रस (व्यंग्य संग्रह), और कितने सबूत चाहिये (कविता संग्रह), प्रसिद्ध अंग्रजी कहानियों का छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद आदि पुस्‍तकें प्रकाशन की प्रक्रिया में है. कुबेर जी नें अनेक पुस्‍तकों को संपदित भी किया है जिनमें साकेत साहित्य परिषद् की स्मारिका 2006, 2007, 2008, 2009, 2010 व शासकीय उच्चतर माध्य. शाला कन्हारपुरी की पत्रिका ‘नव-बिहान’ 2010, 2011 आदि हैं. इन्‍हें जिला प्रशासन राजनांदगाँव का गजानन माधव मुक्तिबोध साहित्य सम्मान 2012 मुख्मंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा प्राप्‍त हुआ है. कुबेर जी का पता ग्राम – भोड़िया, पो. – सिंघोला, जिला – राजनांदगाँव (छ.ग.), पिन 491441 है. वे शास. उच्च. माध्य. शाला कन्हारपुरी, राजनांदगँव (छ.ग.) में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं. उनसे मोबाईल नु. – 9407685557 पर संपर्क किया जा सकता है.
कुबेर जी के आलेखों एवं क‍हानियों को आप उनके ब्‍लॉग 'कुबेर की कहानियॉं' में भी पढ़ सकते हैं. गुरतुर गोठ में कुबेर जी के आलेखों की सूची यहॉं है।

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    गये साल को है प्रणाम!
    है नये साल का अभिनन्दन।।
    लाया हूँ स्वागत करने को
    थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
    है नये साल का अभिनन्दन।।...
    --
    नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    Replies
    1. आदरणीय मयंक साहब
      सादर नमस्कार।
      काव्यमय शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद
      नये साल की शुभकामनाएँ आपको भी ।

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति...!
    नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाए
    RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

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    Replies
    1. आदरणीय भदौरिया साहब
      सादर नमस्कार।
      आपको भी नये साल की शुभकामनाएँ ।

      Delete

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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