ब्लॉग छत्तीसगढ़

31 March, 2010

ओम प्रकाश जिंदल : उर्जा सर्जक लौह शिल्‍पी


किसान से सफल उद्योगपति, सुप्रसिद्ध समाजसेवी व कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में स्व. ओम प्रकाश जिंदल (7 अगस्त 1930-31 मार्च 2005) ने जीवन की प्रत्येक कसौटी पर खरा उतर कर कमर्योगी-सा जीवन बिताया व कठिन परिश्रम, निष्ठा और सच्चाई से प्रत्येक कार्य को उत्कृष्ठा से कर अपने स्वप्नों को साकार कर दिखाया...। उनका जीवन समाज का प्रेरणा स्त्रोत बन, आने वाली पीढ़ियों का सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।
जिंदल समूह का कारोबार सम्पूर्ण दुनिया में फैला हुआ है। स्व. जिंदल ने छत्‍तीसगढ़ में रायगढ़ संयंत्र (जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड) की स्थापना वर्ष 1990 में की थी, जो अब उनके सबसे छोटे सुपुत्र श्री नवीन जिंदल के नेतृत्व में है तथा यह कंपनी अंतरराष्‍ट्रीय क्षितिज में स्टील, ऊर्जा, उत्खनन, गैस, क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रही है। कहते हैं, कुछ लोग जन्म से ही महान पैदा होते हैं, और कुछ लोग अपनी मेहनत के बलबूते पर अपने कर्म की बदौलत महान बनते हैं। ऐसे लोग भावी पीढ़ी के लिए छोड़ जाते हैं, एक आदर्श की छाप जिसे अपनाकर दूसरे लोग भी अपने जीवन में असीम सफलता हासिल करते हैं। स्व. ओम प्रकार्श जिंदल, जिन्हें लोग प्यार से बाबूजी पुकारते थे।
मैन ऑफ स्टील के अलंकरण से सुशोभित स्व. ओम प्रकाश जिंदल तकनीकी एवं इंजीनियरिंग कार्यों में अत्यधिक रूचि रखते थे। उन्होंने तकनीकी एवं इंजीनियरिंग की कोई विधिवत शिक्षा तो नहीं ली थी परंतु इन विषयों में गहरा लगाव और गहन अभिरूचि ने उन्हें उन्नति के शिखर पर पहुंचा दिया। वह ऐसे व्यक्ति थे, जो सर्वप्रथम किसान थे, फिर साधारण व्यापारी, उसके बाद बाल्टी निर्माता और अंत में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के उद्योगपति एवं हरियाणा के लोकप्रिय नेता। उद्योग, राजनीति और जनकल्याण के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई, औद्योगिक विकास और उद्यमशीलता को नई परिभाषा दी। उनका जीवन सफर गांव की जमीन से शुरू होकर स्टील उद्योग के नए आसमान तक जा पहुंचा। हर क्षेत्र में आजीवन उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तक किया। ओम प्रकाश जी की सफलता का उज्ज्वल पक्ष यह था कि वह पैदायशी इंजीनियर थे। उनमें इंजीनियरिंग की जन्मजात प्रतिभा थी, जो असाधारण और अद्भूत थी। कुछ व्यक्ति जो अपनी प्रतिभा का रचनात्मक कार्यों में भरपूर उपयोग करते हैं, उनमें स्व. जिंदल प्रमुख रूप से गिने जाते हैं। वह ऐसे व्यक्ति थे, जो हर कठिन परिस्थिति को भी अपने लिए अनुकूल बनाया था। इस्पात जगत के पुरोधा व स्वच्छ राजनीति के शिखर पुरुष को 31 मार्च पांचवी पुण्यतिथि के अवसर पर शत शत नमन।

3 comments:

  1. Late o.p.jindal mahoday ke punyatithi par likha gaya sunder lekh. isake liye dhanyavaad our subhakaamanaaye.

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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