मां को देवी मानकर मन में रमा लीजिए, फिर किसी और देवी की ज़रूरत नहीं पड़ती। अपनी मां ही सर्वशक्तिदायिनी हो जाती है। आपकी मां की इस पुण्यतिथि पर मेरी यही प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें स्वर्ग में मातृसत्ता के सिंहासन पर आरूढ करे।
मां- मृत्यु के अलावा वो आखिरी ठौर, जहां आकर व्यक्ति शांत हो जाता है, जहां से जाने की जल्दी नहीं होती, जहां कुछ और पाने की बेचैनी नहीं होती। पार्थिव रिश्तों में सबसे अलौकिक है मां। जगज्जननी दुर्गा का ही मूर्त रूप है मां। पुण्यतिथि पर आपकी माता जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
मां को देवी मानकर मन में रमा लीजिए, फिर किसी और देवी की ज़रूरत नहीं पड़ती। अपनी मां ही सर्वशक्तिदायिनी हो जाती है। आपकी मां की इस पुण्यतिथि पर मेरी यही प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें स्वर्ग में मातृसत्ता के सिंहासन पर आरूढ करे।
ReplyDeleteमां- मृत्यु के अलावा वो आखिरी ठौर, जहां आकर व्यक्ति शांत हो जाता है, जहां से जाने की जल्दी नहीं होती, जहां कुछ और पाने की बेचैनी नहीं होती। पार्थिव रिश्तों में सबसे अलौकिक है मां। जगज्जननी दुर्गा का ही मूर्त रूप है मां। पुण्यतिथि पर आपकी माता जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
ReplyDeleteबहुत सुन्दर....अवर्ननिये
ReplyDeleteबहुत सुंदर. ममतामयी माँ को मेरी ऑर से श्रद्धा सुमन अर्पित है. नमन करता हूँ
ReplyDeleteबहुत सुंदर । शब्द छोटे पड जाते हैं । माँ के प्रति आपकी भावनाओं को समझ सकती हूँ, णाँ भी हूँ ऐर बेटी भी ।
ReplyDeleteमाँ के लिए लिखा गया हर शब्द खूबसूरत है माँ सा ही
ReplyDeleteबहुत सुंदर है यह .और शुक्रिया आपका मेरे लिखे को पसन्द करने के लिए [:)]
मेरी भी श्रद्धांजलि मित्र। जिस मनोयोग से आपने लिखा-उकेरा है उससे बहुत कुछ पता चलता है भावना जगत का।
ReplyDeleteश्रद्धांजलि उन्हें!
ReplyDeleteबहुत सुंदर व भावपू्र्ण लिखा है आपने!!
मां सचमुच महान है।
ReplyDeleteिबना उसके सूना जहान है।
....आज उस मां को श्रद्धा सुमन।
मां सचमुच महान है।
ReplyDeleteिबना उसके सूना जहान है।
....आज उस मां को श्रद्धा सुमन।
surjeet.sur@gmail.com
bahut sundar panktiyaan....prasann man se yaad kijiye unhey
ReplyDeleteश्रद्धासुमन
ReplyDeleteमाता को समर्पित
बसे दिल में
हर शब्द माँ की चरण वन्दना करता हुआ सा...
bahut hi marmik kavita hai ...aantima panktiya dil tak gahare utarati hai...
ReplyDeleteLokesh Sharma (Bonn, Germany)
ReplyDeleteजोहर ले. आप मन के कविता हा बड़ा सुघर हावे.
Aadarneey Bhaiya,
ReplyDeleteMarm shparshi rachana hai. Aapki rachana padh kar maa ki yaad aa gayi. Main to jite ji hi aapni maa se dur ho gaya hoon.
Aapse bahoot kuch sikhane ko milta hai.
regards,
Manish Kr. Pandey
mamta se paripudan...
ReplyDeletevatshaly se paripudan..
dhara par iswar ka pratirup maa
punaya tithi par ..
unhe shadar samarpit srdha suman
aapki kavita bahut marmik hai
man ko chhu gaye
आप की माता जी को मेरी भी श्रद्धांजली…आप की कविता ने मुझे मेरी मां की याद दिला दी। आशा है आप की माता जी और मेरी माता जी दोनों वहां सुख से होगीं
ReplyDeleteMa! ek chhota sa dikhne wala shabd jismein saari duniya samayi hai, unke samman mein jitna kaha jaye kam hai.
ReplyDeletebahut sundarta se bhaavon ki abhivyakti ki hai.
shubhkamnayen