ब्लॉग छत्तीसगढ़

25 June, 2007

टाटा स्‍काई बनाम बीएसएनएल ब्राड बैंड


अब बहुतै मुश्किल होत जात है ब्‍लाग में ठहरे रहना रोजै तिरिया के गारी खावै ले बचे खातिर कउनो उपाय करें समझे म नही आत है । अरे भाई लोगन हरे हप्‍ता कउनो नगरी चौपाल म ब्‍लाग मीट कर लिया करो । कम से कम हप्‍ता पंद्रही तो तो‍हांर मीट मटन के फोटू को देखा देखा के अपनी ब्‍लागरी को सुख्‍खाये तरिया कस मछरी जीयाये के कउनो बहाना मिल जईहैं । तोहार मीट के फोटू हमार मेहरारू को गजब नीक लागता है काबर कि ओमा छीट वाला, कढाई बाला पता नही का का परकार के साडी पहिरे, महिला ब्‍लागर को देख के हमार छोटकू के अम्‍मा कहत हैं जोडी ए एतवार को तनि दुई हजार रूपईया राशन सब्‍जी के लिए ज्‍यादा चाहिए था क्‍योंकि आपके गांव से इस माह सगा लोग ज्‍यादा आ गये थे ।

वो जानती है मेरे गांव से आने वालों के सभी खर्चे के लिए मेरा बागिन उलदा जाता है पर मुझे जानते हुए भी नादान बनना पडता है । बागिन का उलदाना सगा के कारण नही हैं मीट के फोटू में छपे साडी के कारण हैं ।

कभी कभार हंसी के पलों में जो विवाह के बाद शायद ही कभी आता हो और हर शादी शुदा उस क्षण के लिए अपना जीवन शिवोहम कह कर जीता है, पत्‍नी बतलाती है कि वो एकता कपूर के सीरियल भी 95 प्रतिशत साडी का पैटन जानने के लिए देखती है । बीच में जस्‍सी जैसी कोई नहीं नें हमारी बीबी का साडी का मूडे खराब कर दिया था फिर जईसे तईसे एकता को नारी एकता का धियान आबेच किया और जस्‍सी को लुगरा पहिनवाई दिये । धन्‍य हे नारी सारी एकता ।

अब टाटा टीबी के बात बतिया लें । हमारे रईपुर वाली परम पियारी सारी के कहने से हम सिटी केबल कटवा के टाटा स्‍काई के कनेक्‍शन ले लिये हैं । ज‍हां हर महिना के खतम होने के पहिले ही टप्‍प से लेटरवा टीवी स्‍क्रीन में टपकता है कहता है पईसा भरो नही तो टीबी देखना बंद । अरे तुहरे बाप का राज है, पहले हमारे डंडा के डर से सिटी केबल वाला चार पांच महीना में डरावत, सपटत दीन हीन बनकर हमारे दुवारी में आता था और ‘जो देना हो दे दो सर’ बोलता था । यहां तो साला अतियाचार है महिना पुरा नही कि धमकी चालू । का झुनझुना धरा दिये रईपुरहिन । रांका राज के जम्‍मो शान को टाटा कहवा दिये ।

यहां भी समझौता बीबी के साथ करना पडता है बीबी की बहन नें जो सलाह दिया है । टापअप कार्ड खरीदो नही तो टीवी बंद जब टीवी बंद तो सब कुछ बंद यानी घर आबाद घरवाली से घरवाली आबाद खुशहाली से और खुशहाली कहां से टीबी से जब टीवी नही न रहेगा तो बसंती कईसे नाची पता कईसे चलेगा धरमेंदर को । चलो भई तीने सौ रूपट्टी तो देना है महीना में, तीन सौ में खुशहाली आ सके तो और जादा भी रूपया खर्च करने को मैं तैयार हूं ।
पिछले दो माह से सरकारी टेलीफोन विभाग से हाथ पांव जोड रहा हूं क्‍योंकि मेरा घर तनिक शहर से आउटर में है दूसरे सेवादाताओं के पहुंच से बाहर । सरकारी फुनवा ही हमारे घर में किर्र कार कर पाता है । कि मेरे घर में ब्राड बैंड कनेक्‍शन लगा दे पर अब जनता जागरूक हो गये हैं । मेरे शहर में पोर्ट खाली नही है नये कनेक्‍शन के लिए । और जब पोर्ट कही से आता है तो मोडेम स्‍टाक में नही रहता । क्‍या करें आशा में जी रहें हैं कि कब हमारे छत्‍तीसगढ में भगवान राम आयेंगें और हमारी डोकरी दाई शबरी के सुकसी बोईर को खायेंगें ।
पर सोंचता हूं टाटा स्‍काई के लिए जो पैसा खर्चता हूं उसके एवज में तो खुशहाली मिलती है साडी का नया पैटर्न पता चलता है । ये ब्राड बैंड से सिवाय लडाई के और कुछ मिलने वाला नही है । अच्‍छा है कैफे में ब्‍लगियाना और टिपियाना घर जाना तो बीबी बच्‍चों के साथ ही बतियाना, नये फिलिम को मूवी आन डिमांड मंगवाना तभी मिलेगा खाना ।
घर में नेट कार्ड भी पांच मिनट से ज्‍यादा नही चलाना ।

10 comments:

  1. हा हा!! सही है!!
    भैय्या ई रांका राज ला बड़े बड़े कंपनी मन हा का जानही!

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  2. बढ़िया है :)
    वैसे, ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन लेने से इससे पैदा हुई परेशानी और टाटास्काई से पैदा हुई ख़ुशहाली के बीच संतुलन बना रहेगा। इसलिए संतुलन की ख़ातिर ही सही, कनेक्शन ले ही लीजिए।

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  3. कुछ दिन तनी और ठहिर जा भइया। इनकर गुंडागर्दी अब्बे आउर बढ़ी। हमहूं डिश टीवी के झेलतानी लेकिन हमार केबल वाला पूरा सरकारी रहे। साड़ी वाला दर्द त सबके बा। तुलसी और पार्वती जब रोवत रहली तबो उनकर साड़ी के डिजाइने पर चर्चा होत रहे।

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  4. एसन बात नाही है संजीव बाबू आप कोन्हू साड़ी दिलवाई देवो...सब मामलात ठीक होई जाए...
    संजीव जी हमे भी अपनी थौड़ी छत्तीसगढ़ की भाषा दिखाई देओ..हम का लिखें...तोहार भाषा नही जानत रहे ना...:)

    सुनीता(शानू)

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  5. हाँ ई तोहार फोटवा बहुत खबसूरत लगै है.. हा हा हा...

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  6. ह्म्म
    तो ये बात हावै!!
    मोला दुरुग आयेच ला पड़ही, बुआ/भौजी ला बताए बर कि तिवारी जी हा इहां ब्लॉग के बहाने काय काय गुल खिलावत हे!!

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  7. अब्बड़ बने रहिस गा।
    (तिवारीजी शायद मैंने ठीक लिखा हो)

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  8. अतुल भैया अडबड दिन ले तोर छत्तीसगढिया गांव के सोर खबर आप बर लाना चाहत हव फ़ेर समय नई मिलत ये जैसे समय मिलही आपके बचपन के गांव के बारे मा लिखहूं

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  9. बहुत बढिया

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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