ब्लॉग छत्तीसगढ़

06 June, 2007

परीक्षण . . . निरीक्षण 123

मदनांतक शूलपाणि

शिव आप मद रूपी मदन को भस्म करने वाले हो आपके हाथो मे सजा देने के लिये दिव्य शूल है मुझे आपके रूप का एहसास है . . .

करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा .
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं .
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व .
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ..


हे शिव ¡ मुझे प्रत्येक व्यक्ति के भावनाओ का आदर करने और विनम्रता धारण करने की शक्ति दे ¡

4 comments:

  1. बढिया है ..पर इसका मतलब भी समझाइये ना...

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  2. अपने तो उपर से निकल गया भैया

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  3. कर ली भाई हमने भी शिव स्तुति.

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  4. बताईये इस मंत्र के जाप से क्या होता है और कितनी बार करना चाहिये...

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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