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अपने ब्‍लॉग में गूगल एडसेंस (adsense) कैसे लगायें

आपको ज्ञात ही होगा कि, गूलग नें हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के लिए गूगल एडसेंस के द्वारा खोल दिए हैं. बहुत से हिन्‍दी ब्‍लॉगर साथी अपने ब्‍लॉग में गूगल एडसेंस लगाने की विधि की जानकारी हमसे लगातार पूछ रहें हैं. हम अपने साथियों के लिए अपने ब्‍लॉग में एडसेंस लगाने की क्रमबद्ध जानकारी इस पोस्‍ट में देनें का प्रयास कर रहे हैं. जिससे कि आप अपने ब्‍लॉग में गूगल एडसेंस आसानी से लगा पायेंगें.


सबसे पहले अपना ब्‍लॉगर में लागईन होईये. डेशबोर्ड खुलेगा, आप अपने जिस ब्‍लॉग में गूगल एडसेंस लगाना चाहते हैं उसके दाहिनें तरफ एक छोटा एरो की दिखेगा. उसे क्लिक करने पर नीचे दिए गए चित्रानुसार एक विकल्‍प पट्टी खुलेगी. जिसमें अर्निंग विकल्‍प को क्लिक करें.

चित्र क्र.1
अब नीचे दिए गए चित्रानुसार पेज आयेगा जिसमें साईनअप फार एडसेंस को क्लिक करें -


चित्र क्र. 2
इसके बाद नीचे दिखाये गए चित्रानुसार पेज खुलेगा जिसमें दो विकल्‍प हैं. पहला- यदि आप अपने मौजूदा जीमेल एकाउन्‍ट से लागईन होना चाहते हैं तो एवं दूसरा- यदि आप मौजूदा जीमेल एकाउन्‍ट से अलग नया एकाउन्‍ट बनाना चाहते हैं तो-  


चित्र क्र. 3

 पहला विकल्‍प चुनें, आगे के पेजों में अपनी व्‍यक्तिगत जानकारी व पता आदि भरें. आगे के क्रम में , अपने ब्‍लॉग का यूआरएल भरें व उसकी भाषा हिन्‍दी भरें. इसे पूर्ण करने के बाद गूगल लगभग 24 घंटे का समय आपके ब्‍लॉग एवं एडसेंस एकाउन्‍ट को एप्रूव करने का समय लेगा.     
चित्र क्र. 4
गूगल से एडसेंस एप्रूवल मेल आने के बाद अपने ब्‍लॉगर एकाउन्‍ट में पुन: लागईन हों एवं उपर दिए गए क्रम एक को दुहरायें. ब्‍लॉगर आपको गूगल एडसेंस लागईन पेज में रिडायरेक्‍ट करेगा. वहां लागईन हों एवं नीचे दिए गए चित्रानुसार 'माई एड' को क्लिक करें-


चित्र क्र. 5
यहॉं नये एड बनाने के लिए एक बटन दिया गया है जिसे क्लिक करने पर विज्ञापन के विभिन्‍न विकल्‍प दिए गए है इसमें से अपने पसंद के किसी विकल्‍प को चुनें एवं नीचे दिए गए 'सेव एण्‍ड गेट कोड' बटन को क्लिक करें- 


चित्र क्र. 6
अब एक विन्‍डो खुलेगा जिसमें से कोड को सलेक्‍ट कर कापी कर लेवें एवं विन्‍डो बंद कर देवें-


चित्र क्र. 7
अब पुन: अपने ब्‍लॉगर डेशबोर्ड में आयें, यहां चित्र क्रमांक एक में दिखाए गए विकल्‍प पट्टी में से 'लेआउट' विकल्‍प चुनें. नीचे दिए गए चित्र के अनुसार पेज खुलेगा-


चित्र क्र. 8
यहॉं, जहॉं आप विज्ञापन लगाना चाहते हैं वहॉं की पट्टी में दिए गए  'एड ए गैजट' लिंक को क्लिक करें. इसे क्लिक करने पर एक विन्‍डो खुलेगा उसमें से 'एचटीएमएल/जावा' विकल्‍प को चुनें. पुन: एक नया विन्‍डो खुलेगा उसमें एडसेंस से प्राप्‍त कोड को पेस्‍ट कर दें. आपके ब्‍लॉग में विज्ञापन गूगल के एप्रूवल के बाद दिखने लगेगा.


चित्र क्र. 9
इस प्रकार से आप अपने ब्‍लॉग से गूगल एडसेंस के माध्‍यम से अतिरिक्‍त कमाई कर सकेंगें. इसके लिए गूगल एडसेंस के कार्यक्रम नीति व नियम एवं शर्तों का पालन करना आवश्‍यक होगा. हिन्‍दी ब्‍लॉग एवं गूगल एडसेंस के संबंध में अन्‍य जानकारी के संबंध में हम आगामी पोस्‍टों में जानकारी देते रहेंगें. यह जानकारी मेरे ब्‍लॉग झॉंपी में भी उपलब्‍ध है.
संजीव तिवारी

छत्‍तीसगढ़ के कुछ और आरूग ब्‍लॉग

सुरेश अग्रहरि
छत्‍तीसगढ़ी भाषा भी अब धीरे-धीरे हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में अपने पाव पसार रही है। पिछले पोस्‍ट के बाद रविवार को पुन: छत्‍तीसगढि़या ब्‍लॉगों को टमड़ना चालू किया तो बिलासपुर के भाई प्रशांत शर्मा का एक हिन्‍दी ब्‍लॉग मिला जिसका नाम छत्‍तीसगढ़ी में है। उन्‍होंनें इसमें लिखा है कि इस ब्लाग में आप उन सभी बातों को पढ़ सकेंगे जो गुड़ी(चौपाल) में की जाती है। राजनीति से लेकर देश, दुनिया, खेल से लेकर लोगों के मेल की बातें, जीत हार की बातें, आपने आस-पास की बाते और भी बहुत कुछ...।  प्रशांत शर्मा जी के गुड़ी के गोठ में पहली पोस्‍ट 11 मई 2011 को लिखी गई है और 26 जून 2011 को पांचवी पोस्‍ट में वे भ्रष्टाचार के दशा-दिशा पर विमर्श प्रस्‍तुत कर रहे हैं। छत्‍तीसगढ़ी शीर्षक पहुना के नाम से राजनांदगांव के सुरेश अग्रहरि जी ने भी ब्‍लॉग बनाया है अभी चार लाईना कवितायें ही इसमें प्रस्‍तुत है। आशा है आगे इनके ब्‍लॉग में ब्‍लॉग शीर्षक के अनुसार अतिथि कलम की अच्‍छी रचनांए पढ़ने को मिलेंगी।

कमलेश साहू
रायपुर के कमलेश साहू जी पेशे से टेलीविजन प्रोड्यूसर हैं, विगत 11 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं एवं वर्तमान में ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ रायपुर में कार्यरत हैं। इनके ब्‍लॉग कही-अनकही में पहली पोस्‍ट 14 जून 2008 को लिखी गई है एवं कुल जमा तीन पोस्‍ट हैं, ताजा पोस्‍ट बाबूजी को कमलेश जी नें बड़ी संजीदगी से लिखा है, कमलेश भाई यदि ब्‍लॉग में सक्रिय रहते हैं तो हमें उनकी कही-अनकही बहुत सी बातें पढ़ने को मिलेंगीं।

स्‍मृति उपाध्‍याय

अपने आप को जानने समझने की कोशिश करती रायपुर की स्मृति उपाध्याय जी के ब्‍लॉग स्‍मृति में पहली पोस्‍ट 18 मार्च 2010 को लिखी गई है और 6 जनवरी 2011 को पब्लिश पोस्‍ट में वो लड़की शीर्षक से लम्‍बी कविता है। इसके बाद लगभग छ: माह से यह ब्‍लॉग अपडेट नहीं है किन्‍तु मार्च 2010 से दिसम्‍बर 2010 तक इसमें लगातार 19 पोस्‍ट पब्लिश किए गए है जिनमें किसी में भी टिप्‍पणियॉं नहीं है, जबकि स्‍मृति जी की लेखनी सशक्‍त है। मुझे लगता है कि इनका ब्‍लॉग किसी भी एग्रीगेटर की नजरों में आ नहीं पाया जिसके कारण इनके ब्‍लॉग में पाठकों की कमी नजर आ रही है। स्‍मृति जी यदि नियमित ब्‍लॉग लिखती है तो हमें उनकी संवेदनशील कवितायें नियमित पढ़ने को मिलेंगीं।
नवम्‍बर 2009 से हिन्‍दी ब्‍लॉग लिख रहे दंतेवाड़ा बस्‍तर से विशाल जी अपने प्रोफाईल में लिखते हैं 'मैनेजमेंट की पढाई तो की मैंने पर मेरे अंदर जो लेखक बसा हुआ था, उसे तो एक दिन बाहर आना ही था, मेरे आसपास जो भी गलत होता है मैं उसे सेहन करने में सक्षम नहीं हूँ, और समाज से अन्याय और बुराई को मिटाने के लिए मैंने पत्रकारिता शुरू की, मेरे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है' जागो भारत जागो नाम से संचालित इस ब्‍लॉग में ताजी पोस्‍ट 5 जून को लिखी गई है। बंसल न्यूज में बतौर छत्तीसगढ़ ब्यूरो हेड कार्यरत प्रियंका जी के ब्‍लॉग से भी आज ही सामना हुआ, यद्धपि छत्‍तीसगढ़ चौपाल में इनके ब्‍लॉग को मैं पूर्व में ही जोड़ चुका हूं, किन्‍तु मैं इस ब्‍लॉग को नियमित पढ़ नहीं पा रहा था। प्रियंका जी जून 2008 से ब्‍लॉग लिख रही हैं। अपनी तेज-तर्रार पत्रकार छवि के लिए छत्‍तीसगढ़ में जानी जाने वाली प्रियंका को नियमित ब्‍लॉग में पढ़ना सुखद रहेगा। 'प्रियंका का खत' ब्‍लॉग समाचार के तह से निकलते अलग-अलग पहलुओं से हमें अवगत कराता रहेगा। दुर्ग के जिला पंचायत के प्रतिभावान सदस्‍य देवलाल ठाकुर जी भी अप्रैल 2008 से ब्‍लॉग लिख रहे हैं। वे लिखते हैं कि उनका ब्‍लॉग 'दुर्ग छत्‍तीसगढ़' दुर्ग शहर की खबरों, राजनीतिक आर्थिक धार्मिक गतिविधियों के समाचारों विचारो की पत्रिका के रूप में प्रस्‍तुत होगी। इस ब्‍लॉग में ताजा प्रवृष्टि 20 मई 2011 की है। यही बात कहने वाले देवरी बंगला, दुर्ग के पत्रकार केशव शर्मा जी भी वही कहते हैं जो देवलाल जी कहते हैं, केशव शर्मा - पत्रकार . दुर्ग, छत्तीसगढ़ नाम से ब्‍लॉग में अभी 11 मई 2011 तक तीन पोस्‍ट हैं। मेरी देहरी के नाम से ब्‍लॉग लिख रही रायपुर की ज्‍योति सिंह जी भी मई 2010 से लिख रही हैं। 15 अप्रैल 2011 को पब्लिश पोस्‍ट कायाकल्‍प में गहन चिंतन है, आगे इस ब्‍लॉग में अच्‍छे पोस्‍ट पढ़ने को मिलते रहेंगें।

यश ओबेरॉय
छत्‍तीसगढ़ के प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं बहुचर्चित नाटकों क्रमश: विरोध, तालों में बंद प्रजातंत्र, मुखालफत (पंजाबी), चीखती खोमोशी, गधे की बारात, ठाकुर का कुंवा, पेंशन, चार दिन, बेचारा भगवान, नाटक नहीं, फंदी, दशमत कैना (छत्तीसगढ़ी) सीरियल और टेली फिल्म - आस्था, तथागत, जरा बच के, मैं छत्तीसगढ़ हूँ, मीत, रूह, जैसे नाटकों में काम करने वाले यश ओबेरॉय जी की भी एक हिन्‍दी ब्‍लॉग यश ओबेरॉय नेट में उपलब्‍ध है जिसमें अक्‍टूबर 2010 में एक कविता पब्लिश की गई है। यश जी छत्‍तीसगढ़ के रंगकर्म व लोकनाट्यों के अच्‍छे जानकार हैं, यदि यह ब्‍लॉग नियमित रहे तो हमें छत्‍तीसगढ़ के थियेटर व लोक कलाओं पर अच्‍छी जानकारी मिल पायेगी।

प्रफुल्‍ल पारे
रायपुर छत्‍तीसगढ़ के पत्रकार प्रफुल्‍ल पारे जी अपने प्रोफाईल में लिखते हैं 'पढ़ाई की औपचारिकता पूरी करने के बाद समय मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल ले गया और वहां से 1993 से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर। दैनिक नईदुनिया, नवभारत में 7 साल बिताने के बाद जिंदगी गुलाबी शहर जयपुर ले गई। इस रेतीली जमीन पर कृषक जगत जैसे खेती पर आधारित अखबार की सफल लांचिंग की। तीन बरस बाद जयपुर भी छूट गया और ईटीवी का सेंटर इंचार्ज बन वापस रायपुर आ पहुंचा। लेकिन जिस रायपुर से गए थे वो जिला था लौटे तो राजधानी। तब से ईटीवी के बाद हरिभूमि फिर नईदुनिया इंदौर का ब्यूरो संभाला, उसके बाद आज की जनधारा का संपादन किया और अब अपना ड्रीम प्रोजेक्ट ग्रामीण संसार को बुलंदियों पर पहुंचाने का इरादा है।' वे विदेह नाम से ब्‍लॉग लिखते हैं। विदेह में अगस्‍त 2010 से जनवरी 2011 तक दो पोस्‍ट डले हैं किन्‍तु समाचारों को विश्‍लेषित करने की क्षमता इन दोनों पोस्‍टों में स्‍पष्‍ट नजर आ रही है। प्रफ़ुल्‍ल जी यदि इस ब्‍लॉग में नियमित रहते हैं तो हमें छत्‍तीसगढ़ की धड़कन स्‍पष्‍ट सुनाई देगी।

सुभाष मिश्र
रायपुर के सुभाष मिश्र जी छत्तीसगढ़ शासन के पाठ्यपुस्तक निगम में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। प्रगतिशील लेखक संघ और भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से उनका जुड़ाव है। नाटकों में गहरी दिलचस्पी के कारण ही पिछले 13 वर्षों से मुक्तिबोध राष्ट्रीय नाट्य समारोह का वे सफल संयोजन करते आ रहे हैं। इनकी तीन किताबें एक बटे ग्यारह (व्यंग्य संग्रह), दूषित होने की चिंता, मानवाधिकार का मानवीय चेहरा प्रकाशित हो चुकी हैं। सुभाष मिश्र जी का जिजीविषा के नाम से ब्‍लॉग है जिसमें जनवरी 2011 को एक पोस्‍ट पब्लिश है उसके बाद इसमें कोई पोस्‍ट नहीं है, थियेटर के गहरे जानकार मिश्र जी का यह ब्‍लॉग यदि जीवंत रहता है तो हमें उनके द्वारा लिखित नाट्य समीक्षा, रंग विमर्श व व्‍यंग्‍य पढ़ने को मिलता रहेगा।

देवेश तिवारी
बिलासपुर से एक जिज्ञासु प्रकृति का नवोदित पत्रकार देवेश तिवारी जी का ब्‍लॉग समय का सिपाही भी उल्‍लेखनीय है। ऍम ऍम सी जे की पढाई कर रहे देवेश भाई नवम्‍बर 2010 से ब्‍लॉग लिख रहे हैं उनके ब्‍लॉग में अप्रैल 2010 तक पोस्‍ट पब्लिश हैं। सामयिक विषयों पर और कविता लिखने वाले देवेश भाई की लेखनी धारदार है। हमें इनके नियमित रहने की प्रतीक्षा है।

अब इस पोस्‍ट के शीर्षक में प्रयुक्‍त शब्‍द 'आरूग' के संबंध में हम आपको बताते चलें। आरूग छत्‍तीसगढ़ी भाषा का शब्‍द है आरूग का अर्थ है ऐसा जो जूठा न हो, जिसका प्रयोग न हुआ हो, जिसे भगवान पर अर्पित किया जा सके। मेरे लिये ये ब्‍लॉग आरूग थे इसलिए मैंने इन ब्‍लॉगों को 'आरूग' लिखा। ऐसे ही कुछ विशेष व उल्‍लेखनीय ब्‍लॉगों को लेकर हम फिर उपस्थित होंगें।

संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ़ में बिना हो हल्‍ला हिन्‍दी ब्‍लॉगों की बढ़ती संख्‍या

छत्‍तीसगढ़ के सक्रिय ब्‍लॉगों पर विचरण करते हुए पिछले  दिनों ब्‍लॉगर प्रोफाईलों के लोकेशन में छत्‍तीसगढ़ लिखे प्रोफाईलों की संख्‍या को देखकर हमें सुखद आश्‍चर्य हुआ। ऐसे प्रोफाईलों की संख्‍या  5317 नजर आई। वर्डप्रेस व अन्‍य ब्‍लॉग सेवाप्रदाओं के द्वारा बनाए गए ब्‍लॉगों के आकड़े हमें नहीं मिल पाये फिर भी ब्‍लॉगर में बनाए गये ब्‍लॉगों को देखते हुए यह माना जा सकता है कि लगभग इसके एक चौंथाई ब्‍लॉग तो निश्चित ही इनमें भी बनाए गए होंगें। इस प्रकार से वर्तमान में छत्‍तीसगढ़ में लगभग 6000 ब्‍लॉगर हैं। इन 6000 ब्‍लॉगर प्रोफाइलों में एक एक में कम से कम दो ब्‍लॉग तो बनाए ही गए हैं, कुछ ऐसे भी प्रोफाईल हैं जिनमें बारह-पंद्रह ब्‍लॉग हैं जो सामाग्री से भरपूर संचालित हैं। इस तरह से प्रदेश में लगभग 15-20 हजार ब्‍लॉग हैं।

ब्‍लॉगर प्रोफाईल से प्राप्‍त आंकड़ों को आनुपातिक रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है। एक, ऐसे ब्‍लॉगर के ब्‍लॉग जो शौकिया तौर पर बनाए गए हैं और उनमें हाय-हलो के अतिरिक्‍त कोई पोस्‍ट नहीं हैं। दसूरा, अंग्रेजी भाषा के ब्‍लॉग हैं जिनमें से अधिकतम में नियतिम या अंतरालों में पोस्‍ट लिखे जा रहे हैं। तीसरा भाग, हिन्‍दी ब्‍लॉगों का आता है जिनमें से अधिकतम में चार - पांच से अधिक पोस्‍ट हैं या वे अंतरालों से लगभग नियमित हैं। आकड़ों के अनुसार हिन्‍दी ब्‍लॉगों की संख्‍या 6000 से कम नहीं है और इनमें से लगभग 1000 ब्‍लॉगों में पांच से अधिक पोस्‍ट यूनिकोड हिन्‍दी में लिखे गए हैं।

कुछ ब्‍लॉग व्‍यावसायिक उद्देश्‍यों से भी बनाए गए हैं जो वेबसाईट की तरह संचालित किए जा रहे हैं तो कुछ ब्‍लॉग ज्‍योतिषियों, प्रमुख व्‍यक्तियों व लोक कलाकारों के प्रोफाईल की तरह भी बनाए गए हैं। व्‍यावसायिक व प्रोफाईल की तरह बनाए गए ब्‍लॉग किसी वेब/ब्‍लॉग तकनीक के जानकार के द्वारा बनाया गया लगता है। इनमें से अधिकतर ब्‍लॉगों का पंजीकरण फीड़ एग्रीगेटरों में नहीं किया गया है, देखने से यह प्रतीत होता है कि इन्‍हें फीड एग्रीगेटरों के संबंध में जानकारी नहीं है। इन ब्‍लॉगों के कमेंट में अब भी वर्ड वेरीफिकेशन लगा हुआ है और ब्‍लॉगिंग के आवश्‍यक विजेट नहीं लगे हैं जिससे यह आभास होता है कि इन्‍हें  'हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत' की जानकारी नहीं है। वे प्रिंट व नेट से आवश्‍यक जानकारी प्राप्‍त कर या स्‍वप्रेरणा से अपना ब्‍लॉग बनाकर  संतुष्‍ट हैं, उनके ब्‍लॉग में पाठक कैसे व कहां से आयेंगें इसकी जानकारी उन्‍हें नहीं है या चिंता भी उन्‍हें नहीं है।  इतनी बड़ी संख्‍या में उपस्थित ब्‍लॉगरों की फौज को ब्‍लॉग के आवश्‍यक पहलुओं से परिचित कराने की आवश्‍यकता है, इनमें से अधिकतम ब्‍लॉग जीमेल, आरकुट या ब्‍लॉगर  में उपस्थित रोमन टू हिन्‍दी सुविधा से  ही हिन्‍दी में संचालित हो रहे हैं। इन्‍हें हिन्‍दी के विभिन्‍न टूलों व आवश्‍यक ब्‍लॉग विजेटों व पुराने फोंटों से यूनिकोड में फोंट परिर्वतन की जानकारी नहीं है। इनमें से कुछ नियमित व मई व जून 2011 तक सक्रिय ब्‍लॉगों को मै पिछले दिनों हमारे जुगाड़ू फीड एग्रीगेटर छत्‍तीसगढ़ ब्‍लॉगर्स चौपाल में जोड़ा हूं । इस जुगाड़ू एग्रीगेटर में ब्‍लॉग हलचल देखने आने वाले पाठकों की संख्‍या भी दिनों दिन बढ़ रही है, अवसर मिलने पर कुछ और ब्‍लॉगों को इसमें जोडूंगा। 

ब्‍लॉगर साथी अपने पोस्‍टों की संख्‍या में वृद्धि व हिट में वृद्धि पर पोस्‍ट पर पोस्‍ट ठोंक कर अपनी मार्केटिंग करते हैं तो हमने भी सोंचा कि हमारे प्रदेश में बढ़ते ब्‍लॉग लेखकों  की संख्‍या से आपको अवगत कराता चलूं। इन आकड़ों से मुझे बेहद खुशी हो रही है, हमारे प्रदेश के लेखकों के विचारों को अब हम उनके ब्‍लॉगों के माध्‍यम से पढ़ पायेंगें । 


संजीव तिवारी

ब्‍लॉगर का नया गैजट : फालो बाई ई मेल

ब्‍लॉगर डाट काम नें अब ब्‍लॉग पोस्‍टों को पाठकों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्‍य से एक नया गैजैट पिछले दिनों प्रस्‍तुत किया है। Follow by Email नाम का यह गैजैट फीडबर्नर के द्वारा प्राप्‍त पोस्‍ट के फीड को हमारे पाठकों के मेल बाक्‍स पर पब्लिश करते ही पहुंचाने में सहायक होगा। 
यह गैजैट लगभग उसी प्रकार है जिस प्रकार हम फीडबर्नर के ई मेल सब्‍सक्रिप्‍शन गैजैट कोड को जनरेट कर अपने ब्‍लाग में लगाते हैं। फीडबर्नर के इस कोड को प्राप्‍त करना एवं इसे अपने ब्‍लॉग में लगाने की प्रक्रिया कई ब्‍लॉगर बंधुओं के लिए किंचित कठिन काम होता है। जबकि इस नये Follow by Email गैजैट को सिर्फ एड करने मात्र से यह गैजैट हमारे ब्‍लॉग में जुड़ जाता है। 
Follow by Email गैजैट में दिए रिक्‍त स्‍थान में यदि हमारा कोई पाठक अपना ई मेल आईडी डाल कर उसे सम्बिट करता हैं तो, उसके बाद से हमारा प्रत्‍येक पोस्‍ट नियमित रूप से उस पाठक को उसके ई मेल बाक्‍स में मिलना आरंभ हो जाता है। इस सुविधा से पाठकों को बार-बार हमारे ब्‍लॉग पर आने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती और वे अपने ई मेल बाक्‍स में ही हमारे पोस्‍टों को पढ़ लेंते हैं। 
..... यद्धपि मेल से पढ़ने वाले पाठक आपके ब्‍लॉग के 
हिट काउंटर की संख्‍या नहीं बढ़ा पायेंगें। 
अधिकतम फीड रीडर ब्‍लॉग पर आकर टिप्‍पणी भी नहीं करते हैं, 
जिसके कारण ब्‍लॉग लेखक को पता नहीं चल पाता कि कौन पाठक मुझे पढ़ रहा है। 
इन दोनों कारणों से टिप्‍पणी प्रेमी और रेंकिंग प्रेमी ब्‍लॉगरों को 
निराशा होगी। 
... किन्‍तु धुरंधर लिख्‍खाड़ ब्‍लॉगरों का भी मानना है कि 
पाठक ही हमारे लिए सर्वोपरि है।


आईये देखें हम Follow by Email गैजैट को अपने ब्‍लॉग में कैसे एड कर सकते हैं। ब्‍लॉगर में लागईन होंवें - डैशबोर्ड में - डिजाईन को क्लिक करें - पेज एलीमेंट में एड ए गैजैट क्लिक करें - यहां पहला गैजैट Follow by Email का है, इस प्रकार -

इसे एड कर लेवें और अपने ब्‍लॉग के साईडबार में लगा देवें। ब्‍लॉग में गैजैट कुछ ऐसा दिखेगा -
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छत्‍तीसगढ़ की कला, साहित्‍य एवं संस्‍कृति पर संजीव तिवारी एवं अतिथि रचनाकारों के आलेख

लूट का बदला लूट: चंदैनी-गोंदा

  विजय वर्तमान चंदैनी-गोंदा को प्रत्यक्षतः देखने, जानने, समझने और समझा सकने वाले लोग अब गिनती के रह गए हैं। किसी भी विराट कृति में बताने को ...