ब्लॉग छत्तीसगढ़

19 June, 2011

प्रो. अश्विनी केशरवानी की कृति बच्चों की हरकतें आनलाईन प्रस्‍तुत

सन् 1980 से 2000 के दो दशक में बच्चों की हरकतों पर भारतीय और विदेशी परिवेश में मनोवैज्ञानिकता के आधार पर प्रो. अश्विीनी केशरवानी जी नें  कई आलेख लिखें हैं। राष्‍ट्रीय पत्रिका धर्मयुग में प्रो. केशरवानी जी की बाल मनोवैज्ञानिक विषयक रचनाएं लगातार प्रकाशित होती रहीं हैं। इसके अलावा इनकी रचनाएं नवनीत हिन्दी डाइजेस्ट और अणुव्रत में भी नियमित छपती रहीं। सर्वोदय प्रेस सर्विस और युवराज फीचर के माध्यम से बच्चों की हरकतों पर रचनाएं देश की छोटी बड़ी सभी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई और रचनाओं के ऊपर अखबारों में संपादकीय लिखे गए। इस महत्‍वपूर्ण विषय पर प्रो. अश्विनी केशरवानी जी के आलेखों का संग्रह 'बच्‍चों की हरकतें' के नाम से पिछले वर्ष प्रकाशित हुआ था।


'बच्‍चों की हरकतें' में संग्रहित सभी आलेखों की उपादेयता को देखते हुए हमनें अपने पाठकों के लिए एक ब्‍लॉग बनाकर उसमें पब्लिश कर दिया है। प्रो. केशरवानी जी से यह कार्य करने का बीड़ा हमने पिछले वर्ष ही लिया था किन्‍तु समयाभाव के कारण इसे समय पर पूर्ण नहीं कर पाये थे। कल देर रात और आज अलसुबह से लगातार कार्य करते हुए इसे अब आनलाईन प्रस्‍तुत कर रहे हैं।






प्रो. केशरवानी जी की इस कृति को ब्‍लॉग प्‍लेटफार्म देने का आग्रह मेरा था किन्‍तु मेरा अनुभव रहा कि ऐसे कार्यों के लिए अतिरिक्‍त समय की आवश्‍यकता होती है किन्‍तु निजी संस्‍थानों में सेवा देते हुए मेरे पास समय की उपलब्‍धता का ही संकट है। छत्‍तीसगढ़ में घोषित तौर पर मुफ्त में ब्‍लॉगिंग सर्विस देने की मेरी छवि को अब बदलने की आवश्‍यकता है, क्‍योंकि इस ब्‍लॉग सेवा के कारण मेरे बहुत से व्‍यवस्थित कार्य में बाधा पहुच रही है। शेष अगले पोस्‍ट में इस पर विस्‍तार से लिखूंगा ....


संजीव तिवारी

8 comments:

  1. अच्छा किया आपने यह लिंक देकर .. आभार.

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  2. बहुत बढ़िया ज़नाब!
    इससे प्रो. की कृतियों को पढ़ने का हमें भी अवसर मिलेगा!

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  3. स्वागत योग्य प्रयास ।
    शुभकामनाएं।

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  4. अच्छी प्रस्तुति।

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  5. प्रिय भाई संजीव जी ,
    मुफ्त में ब्लागिंग सर्विस भले ही ना दें पर आपका थोड़ा सा समय हमें भी चाहिए होता है बस ये ध्यान रखा जाए :)

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  6. समय की कमी ही एक सबसे बड़ी समस्या है भैया।

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  7. समयाभाव के बावजूद आपने मेरी ‘‘बच्चों की हरकतें‘‘ पुस्तक को आन लाइन प्रस्तुत कियाए इसके लिए हार्दिक आभारी हंू

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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