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03 January, 2010

रामहृदय को 11वां रामचंद्र देशमुख सम्मान


छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के अग्रपुरुष दाऊ रामचन्द्र देशमुख की स्मृति में स्थापित तथा लोक संस्कृति के प्रति प्रदीर्घ समर्पण एवं एकाग्र साधना के लिए प्रदत्त रामचंद्र देशमुख बहुमत सम्मान इस वर्ष राज्य के प्रतिष्ठित संस्कृतिकर्मी रामहृदय तिवारी को प्रदान किया जाएगा। दाऊ रामचन्द्र देशमुख की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 14 जनवरी को आयोजित एक गरिमामय समारोह में श्री तिवारी को 11 वें रामचन्द्र देशमुख बहुमत सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत श्री तिवारी को 11 हजार रुपए की सम्मान निधि, शाल, श्रीफल एवं प्रशस्ती पत्र से सम्मानित किया जाएगा।

निर्णायक समिति के निर्णय की जानकारी देते हुए वरिष्ठ कवि जय प्रकाश मानस ने बताया कि यह निर्णय वरिष्ठ साहित्यकार देवेश दत्त मिश्र की अध्यक्षता में गणित निर्णायक समिति द्वारा लिया गया है। समिति में जनवदी शायर मुमताज, रंगकर्मी राजेश गनोदवाले, कवि बीएल पाल, कथाकार विनोद मिश्र, सामाजिक कायकर्ता सुमन कन्नौजे, पत्रकार सहदेव देशमुख एवं समालोचक केएस प्रकाश सदस्य थे।

दुर्ग जिले के उरडहा गांव में 16 सितम्बर 1943 को जन्मे रामहृदय तिवारी लोककला के क्षेत्र में पिछले चार दशकों से सक्रिय है। एक स्वतंत्र रंगकर्मी के रुप में श्री तिवारीर सिर्फ रंगमंच ही नहीं अपितु नाट्यकर्म से जुड़ी अनेकानेक गतिविधियों में निरंतर संलग्न रहें हैं। श्री तिवारी द्वारा निर्देशित अंधेरे के उस पार भूख के सौदागर, भविष्य, अश्वत्थामा, राजा जिंदा है, मुर्गी वाला, झड़ीराम सर्वहारा, पेंशन, विरोध, हम क्यों नहीं गाते, अरण्यगाथा तथा अन्य अनेक हिन्दी नाटक छत्तीसगढ़ के समृद्ध रंगमंचीय इतिहास का हिस्सा तो बने ही, जनता के संघर्षमय जीवन की अंतरंग, शूक्ष्म और संवेदनशील अभिव्यक्ति के वाहक भी बने।

रामहृदय तिवारी ने कसक, संवरी, स्वराज, एहसास जैसी अनेक टेली फिल्मों का भी निर्देशन किया। श्री तिवारी ने छत्तीसगढ़ी नाचा, बोली, लोकगीत, लोककथा, लोक परम्परा, लोक संगीत, लोक नाट्य और लोक अभिव्यक्ति की विभिन्न विधाओं पर निरंतर और सौद्देयपूर्ण लेखन भी किया। वे लंबे संय तक हिन्दी रंगमंच क्षितिज रंग शिविर से जुड़े रहे और वर्तमान में राज्य की अत्यंत प्रतिष्ठित रंग संस्था लोक रंग अर्जुन्दा से संबद्ध है। वे लंबे समय तक दाऊ रामचंद्र देशमुख और दाऊ महासिंग चंद्राकर के सानिध्य में रहे।

बहुमत सम्मान निर्णायक समिति मानती है कि रामहृदय तिवारी ने छत्तीसगढी लोकजीवन की चहल-पहल को अत्यंत कलात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान किया है। दाऊ रामचंद्र देशमुख ने जनता के सुख-दुख को जिस अंतरंगता एवं संवेदनशीलता के साथ लोकनाट्य का हिस्सा बनाया, रामहृदय तिवारी ने उसे सार्थक दिशा और अर्थपूर्ण विस्तार प्रदान किया। महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने पहले रंगकर्म को अपने जीवन का हिस्सा बनाया, बाद में उनका जीवन ही रंगकर्म का हिस्सा बन गया।

इस  ब्लाग मे रामहृदय तिवारी जी द्वारा रचित एवं उनके संबंध में सम्पुर्ण प्रविष्टियां यहां पढें.

(कथाकार विनोद मिश्र द्वारा जारी विज्ञप्ति के आधार पर)
संजीव तिवारी

6 comments:

  1. बधाई हो रामहृदय तिवारी जी को
    और आपको भी संजीव भाई जानकारी देने के लिए।
    आभार

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  2. देर आयद दुरुस्त आयद!
    बहुत प्रसन्नता का क्षण है हम सभी के लिए.

    दिली मुबारक बाद!

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  3. जानकारी देने के लिए धन्यवाद। श्री राम ह्रदय तिवारी जी को बधाई।

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  4. तिवारी जी हमारे प्रदेश के गौरव है उन्हे बधाई ।

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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