ब्लॉग छत्तीसगढ़

16 October, 2007

एक चिंतक रंगकर्मी : राम हृदय तिवारी

डॉ.परदेशी राम वर्मा जी के साहित्‍य व कला जगत के अपने लोगों के संबंध में लगभग 12 खण्‍डों में प्रकाशित 'अपने लोग' पुस्‍तक श्रृंखला के पहले भाग में लगभग 20 वर्ष पूर्व लिखी गई रचना का फोटो प्रारूप हम यहां प्रस्‍तुत कर रहे हैं -














7 comments:

  1. बहुत आभार इस जानकारी और प्रस्तुति के लिये.

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  2. तिवारी जी के संपूर्ण व्यक्तित्व से परिचित कराता एक अच्छा आलेख!!

    शुक्रिया!!

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  3. ek achchha prayas hai, dhanyawad

    prof. ashwini kesharwani

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  4. आपके जैसे क्षेत्रीय व्यक्तित्व कृतित्व को बताने वाले ज्यादा से ज्यादा ब्लॉग्स की जरूरत है।

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  5. बहुत अच्छा लगा पढ़कर !मुरली भैया के गीत का मतलब तो बताईये जरा...आलेख बहुत ही अच्छा लगा और आपने जिस तरह परिचय दिया है तिवारी की के व्यक्तित्व का,उनकी प्रतिभा का और भी अच्छा लगा...

    सुनीता(शानू)

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  6. sanjeev ji..aapne to hame chun chun kar hiron se parichit karwa hai.
    ..EK BAT AAPSE KAHANA CHUNGA..MAINE..AAPNE M.A. FINAL KE 8TH PAPER KE LIYE LAGHU SHODH PRABANDH..LIKHA THA..WAH PARDESHIRAM VERMA KE UPANYAS "PRASTHAN" PAR AADHARIT THA..

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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