2008/03/10

क्या बारहसिंघे के सींगो से बना ताबीज पहनने से साँप नही काटता?

11. हमारे विश्वास, आस्थाए और परम्पराए: कितने वैज्ञानिक, कितने अन्ध-विश्वास?

- पंकज अवधिया


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इस सप्ताह का विषय


क्या बारहसिंघे के सींगो से बना ताबीज पहनने से साँप नही काटता?

देहाती मेलो मे कई तरह के ताबीज बिकते दिख जाते है। कुछ वर्षो से जिस विशेष ताबीज ने मेरा ध्यान खीचा है वह है बारहसिंघे के सींगो से युक्त ताबीज जिसके विषय मे यह दावा किया जाता है कि इसे पहनने मात्र ही से साँप दूर रहते है और उनके काटने का भय नही रहता। बारहसिंघे या स्वाम्प डियर जाने-पहचाने वन्यजीव है। जैसे-जैसे मानव आबादी बढती जा रही है वैसे-वैसे जंगल कम होते जा रहे है। इसका सीधा असर बारहसिंघे जैसे वन्य जीवो पर भी पड रहा है। मैने तंत्र विद्या से सम्बन्धित साहित्यो मे भी इस ताबीज का वर्णन पढा है। इन साहित्यो मे भी ऐसे ही दावे किये गये है। हाल ही मे एक मेले मे ताबीज बेचने वाले से मैने यह प्रश्न किया कि कहाँ से सींग मिलते है? तो वह प्रश्न को टाल गया। क्या अपने आप झडने वाले सींग का उपयोग किया जाता है? उसने कहा कि अपने आप झडे सींग मे शक्ति नही होती है। इसका मतलब सींगो के लिये इनका शिकार किया जाता है। छत्तीसगढ मे ताबीज और दवाओ के लिये वन्य प्राणियो के शिकार की बात हम अखबारो के माध्यम से पढते रहते है। हाल ही मे खबर छपी थी कि वन विभाग ने ऐसे लोगो को पकडा है जो कि तेन्दुए के शिकार के बाद ताबीज और दवाओ के लिये उसके अंगो को एकत्र कर रहे थे।


बारहसिंघे के सींगो से बने ताबीज क्या सचमुच प्रभावी है-यह जानने के लिये मैने छोटा सा प्रयोग किया। देहाती मेले से अलग-अलग कीमत के दस ताबीज खरीदे फिर साँप के स्थानीय विशेषज्ञ की मदद से बारह किस्म के साँप के पास इसे रखा। साँपो पर कुछ असर नही दिखा। तेज जहर वाले नाग के पास जब ताबीज पहनकर एक व्यक्ति को खडा किया गया तो साँप की आक्रमकता पर कोई असर नही दिखा। तो क्या फिर लोगो के डर का लाभ उठाकर ताबीज बेचा जा रहा है? यदि ऐसा है तो तुरंत इसे रोकने कार्यवाही होनी चाहिये। पहले ऐसी बातो को नजर अन्दाज किया जा सकता था पर अब इस तरह के गलत दावो से वन्य पशुओ पर संक़ट आने लगा है। इस विषय मे व्यापक जागरुकता अभियान चलाने की जरुरत है।


मै इस लेख के माध्यम से तंत्र विज्ञान से जुडे लोगो से यह अनुरोध करना चाहूंगा कि वे सामने आये और इस तरह के भ्रम फैलाने वालो के हौसले पस्त करे। यदि आप इस बात को सत्य मानते है कि इसकी प्रमाणिकता सिद्ध करे। हमारे देश मे कई तरह की वनस्पतियो से युक्त मालाए और ताबीज प्रचलन मे है। इनमे से बहुत से प्रयोगो के वैज्ञानिक आधार भी है। यह पाया गया है कि इनका शरीर से लगातार सम्पर्क शरीर को रोग विशेष मे मदद करता है। यह हो सकता है कि बारहसिंघे के ताबीज की अधूरी जानकारी साहित्यो मे हो। इसलिये सच को सामने लाने की जरुरत है।


अगले सप्ताह का विषय



अशोक वृक्ष का पत्ता सिर पर धारण करने से क्या हर कार्य मे सफलता ही मिलती है?

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Gyandutt Pandey said...

ठीक है जी, न जाने कितने अन्धविश्वास हैं, जिनके बल पर या बावजूद भारत चल रहा है।

परमजीत बाली said...

पकंज जी आयुर्वेद में यह सींग दवा बनानें के काम तो आता है लेकिन साँप पर इस का कोइ असर होता है..यह तो पता नही।

Sanjeet Tripathi said...

अपन ने पहली बार सुना यह!!
संभव है कि जिधर बारहसिंगे ज्यादा हों उधर ही यह सुनाई देता हो ताकि बारहसिंगे निपटाएं जा सकें

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