ब्लॉग छत्तीसगढ़

14 September, 2015

हिन्दी मेरी भाषा

मेरे मन की भाषा हिन्दी
मेरे बोल की भाषा हिन्दी।
सबसे सहज, सबसे सरल
सबसे मीठी, हमारी हिन्दी।।

झरने के कल—कल सी हिन्दी
कोयल के मीठे कूक सी हिन्दी।
मिट्टी की सौंधी महक सी हिन्दी
हवा के शीतल बयार सी हिन्दी।।

सूर—रहीम के दोहे में हिन्दी
कबीर—मीरा के साखों में हिन्दी।
निराला, प्रसाद और पंत की हिन्दी
गीत, गज़ल और कविता की हिन्दी।।

मॉं की लोरी—थपकी में हिन्दी
बाबा की झिड़की में हिन्दी।
नानी की कहानियों में हिन्दी
दादा के हर सीख में हिन्दी।।

राष्ट्र गौरव की भाषा हिन्दी
हम सब की अभिलाषा हिन्दी।
मैथिली, उर्दू, अवधी और ब्रज
सबको अपने में मिलाती हिन्दी।।

भारत के माथे की बिन्दी
भारत की पहचान है हिन्दी।
दुनिया की सभी भाषा अच्छी
पर सबसे निराली हमारी हिन्दी।।

डॉ. हंसा शुक्ला
प्राचार्य, स्वामी स्वरूपानंद महाविद्यालय, हुडको भिलाई.

5 comments:

  1. मॉं की लोरी—थपकी में हिन्दी
    बाबा की झिड़की में हिन्दी।
    नानी की कहानियों में हिन्दी
    दादा के हर सीख में हिन्दी।।
    ..हिंदी दिवस पर सुन्दर सामयिक रचना
    हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व हिन्दी सम्मलेन और हमारी हिन्दी में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. अच्छा लिखी हो हंसा ! हिन्दी हमारी राष्ट्र - भाषा है । हिन्दी, हिन्दुस्तान की धडकन है । हिन्दी हमारे सम्प्रेषण की सबसे सशक्त भाषा है । हिन्दी हमारी माता है ।
    जय हिन्दी , जय हिन्दुस्तान ।

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  4. बहुत बढ़िया रचना। बधाई हो

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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