ब्लॉग छत्तीसगढ़

02 February, 2010

बसंत में बिरह - छत्तीसगढी कविता आडियो हिन्दी भावानुवाद सहित

भाई किशोर तिवारी के इस छत्तीसगढी कविता का हिन्दी भावानुवाद हम आप लोगो के लिये प्रस्तुत कर रहे हैं -
मै तुम्हारी चाल को जान गया रे कोयलिया
पहले तू फुदक फुदक कर डंगाल डंगाल मे कूदती रही
और अमरैया मे जा के सभी को निमंत्रित कर आयी
आम के पेडों का चक्कर लगाकर तू सबको बुला लाई
और भंवरा के गुंजन के साथ गीत गुनगुनाने लगी
फिर भी मुझे तुमने नही पूछा कि मेरा क्या हाल है
मै तुम्हारी चाल को जान गया रे कोयलिया
कितना कष्ट दे रहा है मित्र से ना मिल पाने का दर्द
कैसे जी रहा हूँ मै बिना प्रेमिका के
मेरे पल पल युग जैसे बीत रहे है
ऑंखों मे दुख के ऑंसु सरोवर जैसे लबालब भरे है
जिन्दगी की खेती मे अकाल पड गया है
मै तुम्हारी चाल को जान गया रे कोयलिया
बासंती पुरवाही के साथ उसकी याद भी बह रही है
ऑंखों  मे उसकी सूरत झूल रही है
आखिर तू क्या जाने प्रेम का मरम
तू क्या जाने अपने प्रेमी का बिरह
ये प्रेम तो जीवन मे मौत का खेल है
मै तुम्हारी चाल को जान गया रे कोयलिया
मौर आये आम के पेडों को देख कर मेरा मन भरम जाता है
महमहाते बगिया मुझे डोली जैसे लगते है
उपर से तेरा कूकना मेरे हृदय को चीर देती है
अरी तितली अभी रुक जा तू भी मुझे ताना मत दे
मुझे इठलाते चिढाते हुए टेसू लाल हो गये है
मै तुम्हारी चाल को जान गया रे कोयलिया भावानुवाद - संजीव तिवारी 

7 comments:

  1. जोरदार बसंत गीत प्रस्तुतिकरण हे-आप ला बधई

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  2. अच्छा पद्यानुवाद !

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  3. अच्छी कविता और अच्छा अनुवाद बधाई ।

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  4. बहुत सुन्दर है आपकी यह रचना!
    आप यहाँ भी हैं-
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/02/blog-post_02.html

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  5. क्या बात है आज कई लोग कोयलिया से परेशान हैं :)
    बढ़िया

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  6. badhiya.. :)

    Thanks Mahesh Sir.. link unhone hi diya.. :)

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  7. sanjeev! bane anuvaad he
    mai to kaanhi kavita la nai janaun
    par mola senapati ke doo pankti aisne yaade aage
    "Lal Lal Kesi phooli rahe hain bisaal sang
    shyam rang mano mahu masi me milaaye hain"

    lal lal tesu ke phool jaun ha shayad basant ritu maa hi khilthe okhre bar likhe he senapati jee ha.

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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