संजीव तिवारी की कलम घसीटी

16 April, 2009

ऑरकुट में खेल निराले मेरे भैया

पिछले दिनों एक ब्‍लागर साथी व आरकुट मित्र के साथ गंभीर वाकया हो गया। या यूं कहें कि यह वाकया उनके उन सभी आरकुट मित्रों के साथ हो गया जो सुबह दस बजे के लगभग अपना आरकुट स्‍क्रैप खोले। मित्रों नें देखा कि उनका वह गंभीर व शालीन मित्र अपने आरकुट प्रोफाईल में नंगी स्‍त्री का तस्‍वीर लगाया है और जहां जहां उसने स्‍क्रैप किया था वहां वहां वह भद्दी तस्‍वीर उपस्थित होकर स्‍क्रैप की बैंड बजा रहा है । खैर मित्र नें गलती मानी और बाकायदा क्षमायाचना के स्‍क्रैप भेजे साथ ही तस्‍वीर भी बदली। धर्नुधर का तीर निशाने से चूक गया था प्रत्‍यंचा ढीली छोडने का यह नतीजा था ।

इसलिए भाइयों हमेशा जागते रहो और खासकर जब देर रात तक फिरंगी मेमों से चेतियाने की आदत हो तब तो और भी, पासवर्ड चोर, लेख चोर और मन के चोर सभी इस नेट जगत में सक्रिय है । साथ ही I पी और आई D ट्रैकर और दुसरे गोपनीय तकनीक आपके सभी सच झूठ को उजागर करने के लिए भी तैयार रहते है !  

5 comments:

  1. गलतीयां इंसान ही करता है:)

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  2. ऐसी गलती से बचना चाहिए, हो जाए तो क्षमा मांग लेनी चाहिए।

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  3. सत्यवचन प्रभु।

    वैसे किस मित्र के साथ ये हादसा हो गया?

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  4. बड़े कम लफ्जों में आपने बहुत कुछ समझा दिया.......

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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