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21 April, 2008

क्या ड्रुपिंग अशोक का वृक्ष गृह वाटिका मे लगाने से व्यापार मे घाटा होने लगता है?

17. हमारे विश्वास, आस्थाए और परम्पराए: कितने वैज्ञानिक, कितने अन्ध-विश्वास?

- पंकज अवधिया


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इस सप्ताह का विषय


क्या ड्रुपिंग अशोक का वृक्ष गृह वाटिका मे लगाने से व्यापार मे घाटा होने लगता है?


आधुनिक वास्तु शास्त्री गृह वाटिका मे ड्रुपिंग अशोक की उपस्थिति को अशुभ बताते है। वे तर्क देते है कि इसकी पत्तियाँ नीचे की ओर झुकी हुयी होती है। इससे धन की कमी होती जाती है। निराशा पैदा हो जाती है। वे किसी भी कीमत पर इसे हटाने की सलाह देते है और इसकी जगह दूसरे पेडो को लगाने पर जोर देते है।


जैसा कि आपने पहले पढा है अशोक दो प्रकार के होते है। सीता अशोक का वर्णन भारतीय ग्रंथो मे मिलता है और इसके विभिन्न पौध भागो का प्रयोग बतौर औषधी होता है। ड्रुपिंग अशोक सजावटी पौधा है और इसी कारण इसे विदेश से भारत लाया गया है। इसका वर्णन प्राचीन ग्रंथो मे नही मिलता है। आधुनिक वास्तुविदो का दावा पहली ही नजर मे गलत लगता है। यदि वे प्राचीन वास्तुशास्त्र के आधार पर यह दावा कर रहे है तो इसके कोई मायने नही है। ड्रुपिंग अशोक जहरीला पौधा नही है। इसे बिना किसी मुश्किल के वाटिका मे लगाया जा सकता है। दुनिया भर मे इसे पसन्द किया जाता है। रही बात इससे धन मे कमी या निराशा की तो सिर्फ पत्तियो के झुके होने के कारण ऐसा दावा करना गलत है। यह तो देखने का नजरिया है। यदि आप इसके उलट नजरिये से देखेंगे तो आपको यह पेड आसमान की ओर बढते तीर की तरह दिखेगा।



आधुनिक वास्तुविदो ने प्राचीन शास्त्र का नाम लेते हुये आम जनता को खूब छला है। इस लेख के माध्यम से मै उन्हे खुली चुनौती देता हूँ कि वे इसका वैज्ञानिक आधार बताये अन्यथा इस तरह की ठगी बन्द करे।



अगले सप्ताह का विषय

क्या पलाश के वृक्ष से एकत्रित किया गया बान्दा आपको अदृश्य कर सकता है?

1 comment:

  1. अन्धविश्वासों की चपेट में अशोक भी है - यह नहीं मालुम था!

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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आधुनिक वास्तु शास्त्री गृह वाटिका मे ड्रुपिंग अशोक की उपस्थिति को अशुभ बताते है। वे तर्क देते है कि इसकी पत्तियाँ नीचे की ओर झुकी हुयी होती है। इससे धन की कमी होती जाती है। निराशा पैदा हो जाती है। वे किसी भी कीमत पर इसे हटाने की सलाह देते है और इसकी जगह दूसरे पेडो को लगाने पर जोर देते है।


जैसा कि आपने पहले पढा है अशोक दो प्रकार के होते है। सीता अशोक का वर्णन भारतीय ग्रंथो मे मिलता है और इसके विभिन्न पौध भागो का प्रयोग बतौर औषधी होता है। ड्रुपिंग अशोक सजावटी पौधा है और इसी कारण इसे विदेश से भारत लाया गया है। इसका वर्णन प्राचीन ग्रंथो मे नही मिलता है। आधुनिक वास्तुविदो का दावा पहली ही नजर मे गलत लगता है। यदि वे प्राचीन वास्तुशास्त्र के आधार पर यह दावा कर रहे है तो इसके कोई मायने नही है। ड्रुपिंग अशोक जहरीला पौधा नही है। इसे बिना किसी मुश्किल के वाटिका मे लगाया जा सकता है। दुनिया भर मे इसे पसन्द किया जाता है। रही बात इससे धन मे कमी या निराशा की तो सिर्फ पत्तियो के झुके होने के कारण ऐसा दावा करना गलत है। यह तो देखने का नजरिया है। यदि आप इसके उलट नजरिये से देखेंगे तो आपको यह पेड आसमान की ओर बढते तीर की तरह दिखेगा।



आधुनिक वास्तुविदो ने प्राचीन शास्त्र का नाम लेते हुये आम जनता को खूब छला है। इस लेख के माध्यम से मै उन्हे खुली चुनौती देता हूँ कि वे इसका वैज्ञानिक आधार बताये अन्यथा इस तरह की ठगी बन्द करे।



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