2008/03/17

अशोक वृक्ष का पत्ता सिर पर धारण करने से क्या हर कार्य मे सफलता ही मिलती है?

12. हमारे विश्वास, आस्थाए और परम्पराए: कितने वैज्ञानिक, कितने अन्ध-विश्वास?


- पंकज अवधिया


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इस सप्ताह का विषय


अशोक वृक्ष का पत्ता सिर पर धारण करने से क्या हर कार्य मे सफलता ही मिलती है?




तंत्र से सम्बन्धित साहित्यो मे यह दावा किया जाता है। सिर्फ एक पंक्ति के इस दावे का कोई वैज्ञानिक आधार है या नही यह जानने का प्रयास मै लम्बे समय से कर रहा हूँ। विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते जैसा मुझे पढाया गया है, मै इस बात को सुनते ही कह सकता हूँ कि यह निरापद अन्ध-विश्वास है पर जैसा कि मै हमेशा लिखता और कहता रहता हूँ कि प्रत्येक पीढी का यह दायित्व है कि वह अपनी आस्थाओ, परम्पराओ और मान्यताओ का वैज्ञानिक विश्लेषण करे और फिर तर्को के आधार पर अपनी राय व्यक्त करे। बिना किसी विश्लेषण से किसी भी बात को सही या गलत ठहरा देना, विज्ञान के दृष्टिकोण से सही नही जान पडता है।


आप विषय एक बार फिर से पढे। यदि आपके मन मे उस अशोक वृक्ष की याद आ रही है जिसे आम तौर पर घरो मे लगाया जाता है तो आप गलत है। घरो मे सजावट के लिये जिस अशोक को लगाया जाता है उसका वैज्ञानिक नाम पालीएल्थिया लाँगीफोलिया है। यहाँ साराका इंडिका या सीता अशोक की बात कही जा रही है। वही सीता अशोक जिसका न केवल धार्मिक बल्कि औषधीय महत्व भी है। स्त्री रोगो की चिकित्सा मे इसके विभिन्न पौध भागो का प्रयोग होता है। आपने अशोकारिष्ट और हेमपुष्पा का नाम तो सुना होगा। हेमपुष्पा इसका संस्कृत नाम है। अब बात करे इसकी पत्ती के विषय मे।


प्राचीन भारतीय ग्रंथ इसकी पत्तियो के बाहरी और आँतरिक औषधीय उपयोगो का वर्णन करते है। तंत्र साहित्यो मे पत्ती को धारण करने की बात कही जाती है पर इसे धारण करने की विधि नही बतायी जाती है। यही कारण है कि यह समझ लिया जाता है, कि सिर पर इसे बाँधना की धारण करना है। मै पिछले दस से अधिक वर्षो से तांत्रिको से मिलकर इस धारण विधि के विषय मे पूछ रहा हूँ पर सही विधि अभी तक नही जान पाया हूँ।


देश मे पारम्परिक चिकित्सक अशोक की पत्तियो को अन्य प्रकार की पत्तियो के साथ मिलाकर सिरदर्द विशेषकर माइग्रेन की चिकित्सा मे लेप के रुप मे प्रयोग करते है। यह लेप सामान्य स्वास्थ्य के लिये भी अच्छा माना जाता है। तो क्या तंत्र सम्बन्धी साहित्य इसी लेप की बात करते है? या उनकी विधि कोई और है?


यह तो रोग के इलाज की बात हुयी। पर इस दावे के क्या मायने कि इसे धारण करने से सभी प्रकार की सफलता मिलती है? इसकी सही व्याख्या करने की जरुरत है और मूल बातो को सामने लाकर ही इस दावे को परखा जा सकता है। मुझे लगता है कि पूरी व्याख्या किये बगैर आधी अधूरी जानकारियो का प्रकाशन भ्रम पैदा करता है। अत: प्रकाशको को इस ओर ध्यान देना चाहिये।


यदि आप इस विषय मे जानकारी रखते है और इसकी व्याख्या कर सकने मे सक्षम है तो आपका स्वागत है।


अगले सप्ताह का विषय


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Anonymous said...

अशोक की छाल हृदय रोगों में लाभकारी कही गयी है।

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

अरे वाह । अभी तक हम गलत पेंड को अशोक कह रहे थे । रोचक जानकारी ।

Gyandutt Pandey said...

मेरे तो बंगलों में अशोक के अनेक वृक्ष थे। पर कोई खास सफलता उनके निमित्त न मिली।
मेरे ख्याल से मेहनत के बिना कुछ नहीं होता।

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