ब्लॉग छत्तीसगढ़

Popular Posts

28 April, 2007

जस्टिस जगदीश भल्ला : छत्तीसगढ के बासी मे उबाल

छत्तीसगढ समाचार के २७ अप्रेल के अंक में शुभ्राशु चौधरी ने एक सार्गर्भित व जन मानस को झकझोर देने वाला आलेख लिखा है “क्या छत्तीसगढ दोयम दर्जे ...

27 April, 2007

प्रशंगवश

अभिब्यक्ति के प्रत्येक माध्यमो पर आरंभ से ही छीटाकशी होते रही है खासकर उन लोगों के द्वारा ही यह सब होते आया है जिन पर भाषा व भावनाओं को अभिब...

पौरुष की कापीराईट

धुर बस्तर में एक आदिवासी जनजाती मुरिया (मुडिया )निवास करती है । जिनमें विवाह के पूर्व युवा लडके एवं लडकियां गांव में स्थित घोटुल में अपने आप...

23 April, 2007

हेडर के रूप में चित्र को बीटा ब्लागर में जोडना – नये चिटठाकारों के लिये

१ सबसे पहले फोटोशाप या अन्‍य ग्राफिक साफटवेयर से अपना हेडर बनाये, ब्‍लागर में लागईन करें, पहले अपने टेम्पलेट का बेकअप डाउनलोड फुल टेम्पलेट ...

17 April, 2007

नर नारी . . समाधि-सुख के . . शिखर पर : उर्वशी

महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की उर्वशी के कुछ अंश कवि चिट्ठाकारों के मन में जोश व उत्साह लाने के उद्देश्य से प्रस्तुत कर रहा हूं, मैं ये नहीं ज...

16 April, 2007

छत्तीसगढ के हिन्दी ब्लागर्स निराश न होवें : संजीव तिवारी का मूंछों वाला खानदानी दवाखाना आरंभ

अंतरजाल में हिन्दी चिटठाजगत, हिन्दी भाषियों का स्वर्ग है पूरे विश्व में नित नये चिट्ठाकार हिन्दी में चिट्ठा लिख रहें हैं, साहित्यकार साहित्य...

14 April, 2007

छत्तीसगढ के नगाडे की धूम : संपूर्ण विश्व में

गिनीज बुक आफ वल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने छत्तीसगढ के लोक कलाकार स्पात नगरी के रिखी क्षत्रीय ने सौ घंटे अनवरत नगाडा बजाने का छत्तीस...

13 April, 2007

छतीसगढी लघु कथा : कोंन नामवर सिंह ?

पुन्नी के दिन मोर घर सतनरायेन के कथा होये रहिस. वोमा मोर परोसी बलाये के बाद घलव नई आये रहिस. मोर सुवांरी बने मया कर के परसाद ल मोर टेबल में ...

10 April, 2007

छत्तीसगढी राजभाषा दिवस

३० मार्च २००२ को छत्तीसगढ विधानसभा में छत्तीसगढी भाषा को राजभाषा घोषित करने के अशासकीय संकल्प के पारित होने के यादगार क्षणों को अविश्मरणीय ब...

08 April, 2007

छपास ले मन भले भरत होही पेट ह नई भरय - संजीव तिवारी

इंटरनेट म हिन्दी अउ छत्तीसगढी के भरमार ल देख के सुकालू दाऊ के मन ह भरभरा गे वोखर बारा बरिस पहिली कोठी म छाबे भरूहा काडी ल गौंटनिन मेंर हे...

06 April, 2007

मोर सोंच मोर छत्तीसगढी

छत्तीसगढी भासा बोलैया समझैया मन ला मोर जय जोहारमोर मन हा छत्तीसगढी बोले पढे लिखे म अडबड गदगद होथे, काबर नई जानव ? फ़ेर सोचथो मोर जनम इहि छत्त...

एक यायावर : हीरानंद सच्चिदानंद वात्सायन ‘‘अज्ञेय’’

आज लेखक कवि अज्ञेय की महानता के सम्बंध में विशेष रूप से कुछ कहने की आवश्यकता बाकी नही है । हिंदी सहित्य के वे अपने ढंग के मूर्धंय लेखक व सर्...

रोजगार की विवशता और संभावनायें - संजीव तिवारी

बेरोजगारी एवं रोजगार के अपरिमित संभावनाओं के छल के इस दौर में मेरे जैसे लाखों लोग छले जा रहे हैं । मैं उन सभी की बात कर रहा हूं जो ट्रेडिंग,...

04 April, 2007

मेरी फटी पुरानी डायरी के शेष पन्नों से मेरी प्रकाशित छत्तीसगढी कवितायें

दाई मोला सुरता आथे - संजीव तिवारी खदर के छांधी अउ झिपरा के ओधा म तिंवरा के दार संग गुरमटिया चाउंर के भात जेमा सुकसी चिंगरी के साग अउ उहू म ...

02 April, 2007

ग्रह दोष : निवारक टोटके लाल किताब (Lal Kitab) से - संजीव तिवारी

लाल किताब आधुनिक ज्योतिष जगत में काल सर्प के पहले सर्वाधिक चर्चित विषय रहा है, लाल किताब को भारतीय ज्योतिष का फ़ारसी भाषा में उप्लब्...