ब्लॉग छत्तीसगढ़

22 June, 2015

तमंचा रायपुरी की छत्तीसगढ़ी कविता

बेटा सोंचथे
कब ददा पईसा दिही अउ
नवा मोबाईल लेतेंव
वोखर दाई सोंचथे
कब येखर कमई बाढही अउ
नवा लुगरा लेतेंव
मै सोंचथव
कब मोला काम मिलही अउ
बांस खपरा के उधारी छुट लेतेंव
महाजन सोंचथे
कब येखर सक हारतिस अउ
येखर बांचे गाँव के खेत ल बिसा लेतेंव
हमन लुकपुकहा अन हडबड़ाथन
हमर सुख के कथरी ऐसनेहे कंपाथे
कोनो दिन सड़क म हमर फटफटी
इही हडबड़ी म टरक म झंपाथे
महाजन धीर हे, अगोरथे
इहि समे म हमर इलाज अउ
किरिया करम बर हमर खेत ह बेचाथे
अउ हमर जम्मो सउख
धारो धार आसू म बोहाथे.

- संजीव तिवारी "तमंचा रायपुरी"

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