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20 June, 2015

डा: संजय दानी "कंसल" की गज़ल : माहे- रमज़ान

रोज़ा रखो या न रखो माहे- रमज़ान में,
दिल की बुराई तो तजो माहे -रमज़ान में।

ख़ुशियां ख़ूब मना ली जीवन में गर तो,
ग़ैरों के दुख को हरो माहे-रमज़ान में।

कि बड़ों को आगे झुकना वाजिब है पर,
सच के ख़ातिर न झुको माहे -रमज़ान में।

बेश डरो अपने माबूद से जीवन भर,
झूठ फ़रेब से भी डरो माहे-रमज़ान में।

हर ज़ीस्त ख़ुदा का है,हर ज़ीस्त ख़ुदा जब,
ज़ीस्ते ख़ुदा से न लड़ो माहे-रमज़ान में।

पाप की टोकरी तुम सदियों ढो चुके,तो बस,
नेकी की फ़स्ल रखो माहे-रमज़ान में।

उलजन,फ़िसलन,विचलन,संशय बंद भी हो ,
कि सबल किरदार करो माहे-रमज़ान में।

बीबी बच्चों से बड़ा जग में शय ना इक,
वापस घर लौट चलो माहे-रमज़ान में।

डॉ.संजय दानी "कंसल" दुर्ग

डॉ.संजय दानी "कंसल" पेशे से चिकित्‍सक हैं एवं उर्दू अद़ब से जुड़े हुए हैं। इंटरनेट की दुनियॉं में इनका एक ब्‍लॉग भी है। गज़ल एवं कहानियॉं लिखते हैं, वर्तमान में वे दुर्ग जिला हिन्‍दी साहित्‍य समिति के अध्‍यक्ष एवं विभिन्‍न साहित्यिक व अदबी संस्‍थाओं से जुड़े हुए हैं। डॉ.दानी जनअधिकारों एवं जनमुद्दों पर भी समय समय पर आवाज उठाते रहते हैं। अभी हाल ही में उन्‍होंनें भारतीय रेल में यात्रा के दौरान सेवा में कमी के लिए, रेलवे के विरूद्ध दायर किए गए मुकदमें में सफलता पाई है जिसकी सर्वत्र चर्चा हुई है। उक्‍त मुकदमें की संक्षिप्‍त जानकारी यहॉं है

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-06-2015) को "योगसाधना-तन, मन, आत्मा का शोधन" {चर्चा - 2013} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. सटीक रचना

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  3. बहुत सुंदर शब्द ,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .!शुभकामनायें. आपको बधाई
    कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  4. सञ्जय जी ! आप की क़लम में जादू है । आप गज़ल के बादशाह हैं, बहुत अच्छी गज़ल लिखते हैं । विभिन्न विषयों पर आपकी पकड है जिससे पाठक आपसे जुडा रहता है - चरैवेति - चरैवेति ।

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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