17 September, 2011

कहते हैं वो ... 'कहने को क्‍या है ..?'

जी हॉं, छत्‍तीसगढ़ की प्रखर और मुखर कवियत्री पूनम के ब्‍लॉग का यही नाम है। ब्‍लॉग शीर्षक यद्धपि कहता है कि 'कहने को क्‍या है ..?' किन्‍तु कुल जमा चार पोस्‍टों में जन संस्‍कृति मंच से जुड़ी पूनम जी की धारदार कवितायें बहुत कुछ कहती हैं। 

कहने को कुछ नहीं है कहने वाली पूनम की कवितायें क्षेत्रीय एवं राष्‍ट्रीय स्‍तर की विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती हैं और उसपर व्‍यापक चर्चा - विमर्श भी होता है। हमारे लगातार अनुरोध के बाद पूनम जी नें अपना ब्‍लॉग बनाया है, आगे वे इसे नियमित रखेंगी ऐसी आशा है ... 

आईये उनकी कविताओं पर हम भी कुछ कहें ... 'कहने को क्‍या है ..?'


इस चित्र को क्लिक करके आप पूनम जी के ब्‍लॉग में जा सकते हैं. 

7 comments:

  1. रचनाधर्म की बेमिसाल मिसाल, आवरण ही जज्‍बात उडेल रहा हैं , लिखे सदा लिखे , पर रागदरबारी न हो ........

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  2. पहली बार यहां आया हूं।
    अच्छा लगा।

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  3. परिचय कराने का शुक्रिया। आप सचमुच में हिन्दी का प्रसार कर रहे हैं।

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  4. संजीव जी ,आरम्भ बहुत ही सार्थक शीर्षक है.बहुत कुछ यहीं से आरम्भ होता है.

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  5. परिचय करवाने का शुक्रिया .. अच्छा किया उनका ब्लॉग बनवा कर ...

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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