2008/02/18

क्या सफेद फूलो वाले कंटकारी (भटकटैया) के नीचे गडा खजाना होता है?

8. हमारे विश्वास, आस्थाए और परम्पराए: कितने वैज्ञानिक, कितने अन्ध-विश्वास?

- पंकज अवधिया

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इस सप्ताह का विषय

क्या सफेद फूलो वाले कंटकारी (भटकटैया) के नीचे गडा खजाना होता है?

बैगनी फूलो वाले कंटकारी या भटकटैया को हम सभी अपने घरो के आस-पास या बेकार जमीन मे उगते देखते है पर सफेद फूलो वाले भटकटैया को हम सबने कभी ही देखा हो। मै अपने छात्र जीवन से इस दुर्लभ वनस्पति के विषय मे तरह-तरह की बात सुनता आ रहा हूँ। बाद मे वनस्पतियो पर शोध आरम्भ करने पर मैने पहले इसके अस्तित्व की पुष्टि के लिये पारम्परिक चिकित्सको से चर्चा की। यह पता चला कि ऐसी वनस्पति है पर बहुत मुश्किल से मिलती है। तंत्र क्रियाओ से सम्बन्धित साहित्यो मे भी इसके विषय मे पढा। सभी जगह इसे बहुत महत्व का बताया गया है। सबसे रोचक बात यह लगी कि बहुत से लोग इसके नीचे खजाना गडे होने की बात पर यकीन करते है।


आमतौर पर भटकटैया को खरपतवार का दर्जा दिया जाता है पर प्राचीन ग्रंथो मे इसके सभी भागो मे औषधीय गुणो का विस्तार से वर्णन मिलता है। आधुनिक विज्ञान भी इन उपयोगो को मान्यता देता है। यही कारण है कि न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के पुस्तकालयो मे ढेरो शोध-पत्र इस वनस्पति पर उपलब्ध है। देश के दूरस्थ अंचलो मे यह वनस्पति आज भी लाखो रोगियो को आराम पहुँचा रही है।


न केवल छत्तीसगढ बल्कि देश के अन्य राज्यो मे भ्रमण के दौरान मुझे कई बार सफेद फूलो वाले दुर्लभ कहे जाने वाले भटकटैया को देखने का अवसर मिला। कौतूहलवश मैने खुदाई भी करवायी पर नतीजा सिफर ही रहा। बाद मे मैने जब इसका उपयोग करने वाले पारम्परिक चिकित्सको को इस खुदाई और नाकामी के बारे मे बताया तो उन्होने स्पष्ट किया कि इस वनस्पति को पा लेना ही खजाने को पाने जैसा है। इसे सामान्य भटकटैया की तुलना मे औषधीय गुणो मे अधिक समृद्ध माना जाता है। कैंसर जैसे जटिल रोगो की चिकित्सा मे इसे मुख्य घटक के रूप मे दवा मे मिलाया जाता है। छत्तीसगढ के पारम्परिक चिकित्सक तो सिकल सेल एनीमिया की चिकित्सा मे इस दुर्लभ वनस्पति का प्रयोग करते है। पारम्परिक चिकित्सक बताते है कि खजाने वाली बात के कारण अब यह बडी मुश्किल से मिलती है। वे मुझसे इंन स्थानो के विषय मे न लिखने का अनुरोध करते रहे। मैने इसकी तस्वीरे ली और थोडा लिखा अपने शोध आलेखो के माध्यम से ताकि आधुनिक विज्ञान भी इस पर प्रयोग कर सके।


आम तौर बहुत सी दुर्लभ वनस्पतियो से ऐसी बाते जुडी हुयी होती है। अक्सर इन बातो के कारण वनस्पति के अस्तित्व के लिये खतरा पैदा हो जाता है। मै अभी तक के अनुभवो के आधार पर यह कह सकता हूँ कि गडे खजाने वाली बात सही नही लगती है पर विज्ञान का छात्र होने के नाते इन बातो की असलियत जानने के लिये सफेद भटकटैया की खोज और खुदाई मै जारी रखना चाहूंगा। यदि इसके नीचे आपको कभी खजाना मिला हो तो बताये?

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Gyandutt Pandey said...

पँकज अवधिया जी के घर के नीचे भी बहुत खजाना गड़ा है! आपको नहीं मालूम?! :-)

Udan Tashtari said...

आज खुदवाता हूँ -नजदीक के बगीचे में लगा है. :)

Udan Tashtari said...

मुझे लगता है कि इस वनस्पति के गुण देखते हुए ये यूँ कहा गया होगा-क्योंकि स्वास्थय को सबसे बड़ा खजाना माना गया है.

Sanjeet Tripathi said...

किधर है खजाना, 50-50 चलेगा क्या ;)

mamta said...

भटकटैया के लिए हमने सुना है कि अगर पैर मे corn हो तो इसे लगाने से ठीक हो जाता है।

anitakumar said...

ये पंकज जी कहां कहां पंख फ़ैला रहे हैं जी ज्ञान जी के ब्लोग पर और अब आप के ब्लोग पर भी वनस्पति

anitakumar said...

ये पंकज जी कहां कहां पंख फ़ैला रहे हैं जी ज्ञान जी के ब्लोग पर और अब आप के ब्लोग पर भी वनस्पति

anitakumar said...

ये पंकज जी कहां कहां पंख फ़ैला रहे हैं जी ज्ञान जी के ब्लोग पर और अब आप के ब्लोग पर भी वनस्पति

' said...

भटकटैया के बारे मे सुना है पर शहरी होने से .......इसे देखने का मौका भी नही मिला है .

' said...

भटकटैया के बारे मे सुना है पर शहरी होने से .......इसे देखने का मौका भी नही मिला है .

छत्‍तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

पंकज भईया मेरे गांव में इसके संबंध में यह भी कहा जाता है कि यदि सफेद भसकटिया को कहीं भी देखने के बाद वापस घर आकर कुदाल सहित उसी स्थान पर जाने पर वह अछप हो जाता है ।

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