ब्लॉग छत्तीसगढ़

27 July, 2007

दीवारों पर लिखा है

रायपुर, छत्‍तीसगढ से एक लोकप्रिय सांध्‍य दैनिक 'छत्‍तीसगढ' प्रकाशित होता है जिसके संपादक हैं वरिष्‍ठ पत्रकार सुनील कुमार जी । उनके इस समाचार पत्र के संपादकीय पन्‍ने पर प्रत्‍येक दिन दीवारों पर लिखा है नाम से कोटेशन प्रकाशित होता है । जो प्रत्‍येक दिन पाठक को बरबस अपनी ओर खींचता है एवं पढने व चिंतन करने को विवश करता है । सुन्‍दर सरल हस्‍तलिपि में लिखे गये इन शव्‍दों की कुछ कतरने आज हमारे एक दोस्‍त की डायरी के खीसे में अचानक हमें मिल गयी, हमने उसे पढा एवं हमें लगा कि इसे अपने चिट्ठे में सुरक्षित रख लिया जाए













आपको कैसे लगी हमारे छत्‍तीसगढ अखबार की कतरने ।

8 comments:

  1. अच्छी इबारतें.

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  2. पैरों के बहुत से निशान किसी रास्ते को सही नहीं बताते - बहुत अच्छा! रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता याद है - मैं कम चले रास्ते पर चला और उसी से सारा अंतर आया.
    भेड़ चाल का युग और यह इंक-ब्लॉग. सवेरे सवेरे सोचने को टिकल कर गया.

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  3. धन्यवाद ये वो बाते है जो अक्सर हमारे बुजुर्ग हमे शिक्षा के रूप में देते रहते है,जो हमारी जिन्दगी के मायने बदल देती है...अच्छा लगा ज्ञानवर्धक बाते पढ़कर...

    सुनीता(शानू)

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  4. सारगर्भित और ज्ञानवर्धक ।

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  5. बहुत गहरी बातें हैं। इन्हें संजो कर रखना ही चाहिए।

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  6. कविता चौराहे पर - याद आ गया. बहुत पहले छत्तीसगढ़ - रायपुर भिलाई दुर्ग नांदगांव में ये आयोजन संभवतः देशबन्धु के तत्वावधान में होता था. तब भी ऐसी ही हाथ से लिखी गई कविताएँ सड़कों पर तथा देशबन्धु के पृष्ठों पर आती थीं. तब सुनील वहां वरिष्ठ पत्रकार थे.

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  7. सुनील कुमार जी का अखबार कई मायनों में यहां के अन्य अखबारों से अलग है, कई मौकों पर तो वह सुबह के अखबारों से बेहतर साबित होता है।
    शुक्रिया!!

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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रायपुर, छत्‍तीसगढ से एक लोकप्रिय सांध्‍य दैनिक 'छत्‍तीसगढ' प्रकाशित होता है जिसके संपादक हैं वरिष्‍ठ पत्रकार सुनील कुमार जी । उनके इस समाचार पत्र के संपादकीय पन्‍ने पर प्रत्‍येक दिन दीवारों पर लिखा है नाम से कोटेशन प्रकाशित होता है । जो प्रत्‍येक दिन पाठक को बरबस अपनी ओर खींचता है एवं पढने व चिंतन करने को विवश करता है । सुन्‍दर सरल हस्‍तलिपि में लिखे गये इन शव्‍दों की कुछ कतरने आज हमारे एक दोस्‍त की डायरी के खीसे में अचानक हमें मिल गयी, हमने उसे पढा एवं हमें लगा कि इसे अपने चिट्ठे में सुरक्षित रख लिया जाए













आपको कैसे लगी हमारे छत्‍तीसगढ अखबार की कतरने ।
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