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15 December, 2012

संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा

जयतु संस्कृतम् । वदतु संस्कृतम् । पठतु संस्कृतम् । लिखतु संस्कृतम् ॥ का नारा इंटरनेट में बुलंद करने वाले बहुत कम लोग ही सक्रिय हैं जिसमें से एक हैं डॉ० संकर्षण त्रिपाठी जी. इनके ब्लॉग से मैं पिछले दिनों रूबरू हुआ. ब्लॉग में इन्होंनें 'संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा' पर सात कड़ियों में पोस्ट लिखा है. इन पोस्टों पर लिखते हुए उन्होंनें पाठकों से कहा है कि 'यदि संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा विषयक मेरा यह प्रयास सुधीजनों को आत्मिक संतोष प्रदान करते हुए कामशास्त्र एवं कामसूत्र के संबन्ध में प्रचलित भ्रान्त धारणाओं को निर्मूल करने में सहायक हो सके, यही इस परिश्रम का प्रतिफल एवं कार्य की सफलता होगी।' 
लिंक यहॉं है :


संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (1)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (2)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (3)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (4)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (5)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (6)
संस्कृत वाङ्मय में कामशास्त्र की परम्परा (7)

2 comments:

  1. बहुत ही श्रेष्ठ प्रयास..

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  2. परंपरा के निर्वहन के लिए संकर्षण त्रिपाठी जी को प्रणाम

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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