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28 June, 2010

लोकगीत 'बखरी के तूमा नार बरोबर मन झुमरे' हिन्‍दी अनुवाद और वीडियो

बखरी के तूमा नार बरोबर मन झुमरै
डोंगरी के पाके चार ले जा लाने दे बे.
मया के बोली भरोसा भारी रे
कहूँ दगा देबे राजा लगा लेहूँ फॉंसी.
बखरी के तूमा नार .....
हम तैं आघू जमाना पाछू रे
कोने पावे नहीं बांध ले मया म काहू रे.
डोंगरी के पाके चार ....
तोर मोर जोड़ी गढ़ लागे भगवान,
गोरी बइंहा म गोदना गोदाहूँ तेरा नाम.
बखरी के तूमा नार .....
मउहा के झरती कोवा के फरती
फागुन लगती राजा आ जाबे जल्‍दी.
बखरी के तूमा नार .....
डोंगरी के पाके चार ....

गीत सुने व वीडियो देखें युवराज भाई के यू ट्यूब चैनल से -



प्रिये ! घर की बगिया में लगे लौकी के बेल की तरह मन झूम रहा है. प्रियतम ! तुम जंगल से मेरे लिए पके हुए चार फल ला देना.
तुम्‍हारे प्रेम की बोली में मुझे बहुत भरोसा है, मेरे राजा अगर तुमने धोखा दिया तो मैं फॉंसी लगा लूंगी.
हम दोनों प्रेम के रास्‍ते पर बहुत आगे बढ़ चुके हैं, जमाना पीछे छूट चुका है. अब हमारे प्रेम को कोई रोक नहीं सकेगा और हम एक दूसरे के अतिरिक्‍त किसी दूसरे के प्रेम पाश में नहीं बंधेंगें.
प्रियतम भगवान नें हमारी तुम्‍हारी जोड़ी बनाई है. मैं अपनी गोरी बाहों में तुम्‍हारा नाम गुदवांउगी.
महुआ के फूल जब झरने लगे, और कोवा पकने लगे, तब फागुन के आते ही मेरे पियतम तुम शीघ्र आना.

(चार फल जिसकी चिरौंजी मेवे में उपयोग किया जाता है)

10 comments:

  1. आपकी रचना पढ़ कर मन गदगद हो गया बधाई हो।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी
    ////////////////////

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  2. का केहे जाय! हमर भाखा हमर गोठ। हनुमान जी मा चढ़ा रोंठ। हमर बोली देश भर मा अपन अलख जगाय। बढ़िया लगिस तोर ये उपाय। "चल तूमा के नार तैं कैसे झूले हिंडोलना" के सुरता आगे। बधाई।

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  3. संजीव भाई,
    आप ढूंढ ढूंढ कर मोती ला रहे है मेरी पसंद के और अनुवाद तो गज़ब है !
    एक सुझाव है अगर जमे तो ...क्या ये संभव होगा कि कवि और गायक , दोनों के नामों का भी उल्लेख किया जा सके ?

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  4. भाई संजीव एक बात बताओ
    क्या तुम्हारे पास ऐसे ही शानदार गीतों का पूरा संग्रह है क्या..
    मुझे एक कापी चाहिए सुनने के लिए
    जिस गीत का जिक्र तुमने अपनी पोस्ट में किया है वह मैं आकाशवाणी से सुनता था।

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  5. बने बूता चलत हे,
    मजा आगे सुन के

    अड़बड़ दिन पाछु ए गीत ला सुनेवं।
    जुन्ना दिन के सुरता आगे।
    गजपाल भाई हां बने संजो के रखे हे।

    काबर रिसा गे दमांद बाबू दुलरु मिलही त उहु ला लगाबे। सुने बर मोरो मन झुमरत हे।

    जोहार ले

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  6. jis geet kaa anuvaad itna acchaa hai...uske moulik shabd kitane acche honge. dhanyavaad.

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  7. sundar,
    shukriya bhaiya is video ke liye

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  8. इस गीत को 25-30 बरस पहले कुलेश्वर ताम्रकार के मुँह से एक काअर्यक्रम मे सुना था ।

    लेकिन अनुवाद तुम्हारा गज़ब का है ,,,।

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  9. मन-भावन प्रस्तुति ।

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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