ब्लॉग छत्तीसगढ़

13 August, 2009

कविता पर तनाव : विविक्षा ब्‍लाग से

छत्तीसगढ़ में शायद पहली बार किसी कवि की कविता पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। पेशे से शिक्षक कवि बद्रीप्रसाद पुरोहित की कविता सरायपाली के एक अखबार में छपी थी। बसना, सरायपाली और पिथौरा क्षेत्र तक सीमित अखबार छत्तीसगढ़ शब्द में आखिर ऐसा क्या था कि मुस्लिम समाज के कुछ युवकों ने उन्हें स्कूल से बाहर बुलाया और मारपीट की। आगे की जानकारी और कवि की उस कविता को पढें रायपुर से प्रकाशित समाचार पत्र छत्तीसगढ़ में सहायक संपादक के पद पर कार्यरत श्री डॉ. निर्मल साहू के ब्‍लाग विविक्षा में.

श्री साहू जी के इस ब्‍लाग में अभी तक यही आखरी पोस्‍ट है इसके बाद इस ब्‍लाग में नियमित पोस्‍ट नहीं है. उनकी व्‍यस्‍तता हम समझ सकते हैं किन्‍तु विविक्षा के कुल 17 पोस्‍टों को पढते हुए ऐसा लगता है कि विविक्षा को नियमित रहना चाहिये. आप अपनी राय विविक्षा में ही देवें तो बेहतर होगा.

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आपकी टिप्पणियों का स्वागत है. (टिप्पणियों के प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है.) -संजीव तिवारी, दुर्ग (छ.ग.)

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13 August, 2009

कविता पर तनाव : विविक्षा ब्‍लाग से

छत्तीसगढ़ में शायद पहली बार किसी कवि की कविता पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। पेशे से शिक्षक कवि बद्रीप्रसाद पुरोहित की कविता सरायपाली के एक अखबार में छपी थी। बसना, सरायपाली और पिथौरा क्षेत्र तक सीमित अखबार छत्तीसगढ़ शब्द में आखिर ऐसा क्या था कि मुस्लिम समाज के कुछ युवकों ने उन्हें स्कूल से बाहर बुलाया और मारपीट की। आगे की जानकारी और कवि की उस कविता को पढें रायपुर से प्रकाशित समाचार पत्र छत्तीसगढ़ में सहायक संपादक के पद पर कार्यरत श्री डॉ. निर्मल साहू के ब्‍लाग विविक्षा में.

श्री साहू जी के इस ब्‍लाग में अभी तक यही आखरी पोस्‍ट है इसके बाद इस ब्‍लाग में नियमित पोस्‍ट नहीं है. उनकी व्‍यस्‍तता हम समझ सकते हैं किन्‍तु विविक्षा के कुल 17 पोस्‍टों को पढते हुए ऐसा लगता है कि विविक्षा को नियमित रहना चाहिये. आप अपनी राय विविक्षा में ही देवें तो बेहतर होगा.
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