हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा : अनुगूँज 22
(चित्र बडा करके पढे)हमने फुरसद के क्षणों में भईया फुरसतिया की बातों को मानते हुए परयास किया है आशा है आपको भी पसंद आयेगा ।
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9 (टिप्पणी) यहां क्लिक कर मुझे सुझाव देवें:
आपकी उम्मीद बिल्कुल सही निकली. पसंद आया. हस्तलेख की पुनः तारीफ करुँ क्या?
अच्छा है। हस्तलेख तो बहुत अच्छा है। ऐसे ही लिखते रहें।
अनुवाद का अनुबंध दिलायें तो रवी रतलामी को और मुझे न भूल जायें. आपको जालजगत में इतने आनुवादपटु कहीं न मिलेंगे. कुछ नगद नारयण की प्राप्ति हो जायगी.
हस्तलिपि तो कमाल है.
विचार भी विचारणीय है. आमीन कहते है, और क्या.
ख़ूब रंग-बिरंगा !
बढ़िया :)
हस्त लिपि थोड़ी बिगाड़ो - वर्ना हमें शर्म आ रही है. और ये सारी मलाई छत्तीसगढ़ को ही देने का इरादा है - झारखण्ड, ओडिसा, बिहार, पूर्वांचल को भी अमेरिका नहीं तो इटली तो बनादो!
हा हा , मस्त!!!
ज्ञान दद्दा, इनकी हस्तलिपि देख कर हमें भी शर्म आती है लेकिन छू कर निकल जा रही है!!
वाह संजीव भाई, मस्त लिखा। हस्तलेख भी बहुत सुन्दर है।
आपके सुलेख को देख कर बचपन में पिताजी की नसीहत याद आ गई जब वे अक्षरों के मामले में हमेशा सतर्क किया करते थे.सुलेख मन की स्वच्छता का आईना भी होता है संजीव भाई.इससे प्रेरणा भी मिलती है कि साफ़-सुथरा लिखा जा सकता है.पांडेजी और संजीत भाई से कहना चाहूँगा कि मित्रवर..हिन्दी सुलेख के पथ पर सबसे बड़ा रोड़ा है बाँपपेन का इस्तेमाल..इसी का सब किया धरा है ये कचरा...फ़ाउंटन पेन आज भी सुलेख के लिये सबसे ज़्यादा मुफ़ीद है.
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